Cholesterol – स्वस्थ भोजन के बावजूद क्यों बढ़ सकता है खराब कोलेस्ट्रॉल स्तर…
Cholesterol – आज की व्यस्त जीवनशैली में बढ़ता कोलेस्ट्रॉल हृदय स्वास्थ्य से जुड़ी प्रमुख चिंताओं में शामिल है। आम धारणा यह है कि यदि कोई व्यक्ति संतुलित और पौष्टिक भोजन करता है तो उसके शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल यानी LDL नहीं बढ़ेगा। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। कई ऐसे कारण हैं जो अच्छी डाइट अपनाने के बावजूद भी LDL के स्तर को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में केवल भोजन ही नहीं, बल्कि जीवनशैली और अन्य स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं पर भी ध्यान देना जरूरी माना जाता है।

आनुवंशिक कारण भी बन सकते हैं जिम्मेदार
कुछ लोगों में बढ़ा हुआ LDL उनकी खानपान की आदतों से नहीं, बल्कि आनुवंशिक कारणों से जुड़ा होता है। चिकित्सकीय भाषा में इसे फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया कहा जाता है। इस स्थिति में शरीर रक्त से LDL को प्रभावी ढंग से बाहर नहीं निकाल पाता, जिससे इसका स्तर सामान्य से अधिक बना रह सकता है। ऐसे लोगों में बचपन या कम उम्र से ही कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ पाया जा सकता है। इसलिए यदि परिवार में इस समस्या का इतिहास रहा हो, तो समय-समय पर स्वास्थ्य जांच और डॉक्टर की सलाह लेना महत्वपूर्ण माना जाता है।
शारीरिक गतिविधि की कमी का असर
केवल अच्छा भोजन करना पर्याप्त नहीं होता, नियमित शारीरिक गतिविधि भी उतनी ही जरूरी है। लंबे समय तक बैठे रहकर काम करने की आदत शरीर की ऊर्जा खपत को कम कर देती है और अतिरिक्त वसा जमा होने लगती है। इससे अच्छे कोलेस्ट्रॉल यानी HDL का स्तर प्रभावित हो सकता है, जबकि LDL बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है। विशेषज्ञ प्रतिदिन कम से कम 30 से 45 मिनट तक तेज चाल से चलने, योग या किसी अन्य शारीरिक व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाने की सलाह देते हैं।
संतुलन से अधिक वसा का सेवन भी नुकसानदायक
घी, मेवे और कुछ वनस्पति तेल पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, लेकिन इनका अत्यधिक सेवन स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल सकता है। विशेष रूप से सैचुरेटेड फैट और ट्रांस फैट अधिक मात्रा में लेने से खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का खतरा रहता है। तले हुए खाद्य पदार्थ, बेकरी उत्पाद, पैकेज्ड स्नैक्स और बार-बार इस्तेमाल किए गए तेल में बनी चीजें लंबे समय में हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकती हैं। इसलिए भोजन में मात्रा और संतुलन दोनों का ध्यान रखना आवश्यक है।
तनाव और अपर्याप्त नींद भी डालते हैं प्रभाव
मानसिक तनाव और पर्याप्त नींद का अभाव भी कोलेस्ट्रॉल के स्तर को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण कारकों में गिने जाते हैं। लगातार तनाव रहने पर शरीर में कुछ हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे वसा के चयापचय पर असर पड़ सकता है। वहीं लगातार कम नींद लेने से शरीर की मरम्मत और चयापचय संबंधी प्रक्रियाएं प्रभावित होती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित और पर्याप्त नींद के साथ तनाव कम करने के उपाय, जैसे ध्यान या हल्का व्यायाम, हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हो सकते हैं।
प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से भी बढ़ सकता है जोखिम
बाजार में उपलब्ध कई पैकेज्ड उत्पाद स्वास्थ्यवर्धक होने का दावा करते हैं, लेकिन उनमें अतिरिक्त चीनी, प्रिजर्वेटिव और अन्य एडिटिव्स मौजूद हो सकते हैं। ऐसे खाद्य पदार्थ नियमित रूप से खाने पर लिवर पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, जिससे ट्राइग्लिसराइड्स और LDL दोनों का स्तर प्रभावित हो सकता है। पैकेज्ड जूस, एनर्जी ड्रिंक, कुछ प्रोटीन बार और इंस्टेंट स्नैक्स इसका उदाहरण हैं। विशेषज्ञ प्राकृतिक, कम प्रोसेस्ड और संतुलित आहार को लंबे समय तक हृदय स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए बेहतर विकल्प मानते हैं।