Election – एसआईआर विवाद पर विपक्ष का CJI को संयुक्त पत्र, उठी न्यायिक हस्तक्षेप की मांग
Election – निर्वाचन आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है। कांग्रेस ने जानकारी दी है कि 23 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय सांसद ने भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत को संयुक्त पत्र भेजकर इस प्रक्रिया और चुनाव से जुड़े अन्य मुद्दों पर न्यायपालिका के हस्तक्षेप का अनुरोध किया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर इसकी जानकारी साझा करते हुए कहा कि विपक्षी दलों ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर अपनी चिंताएं पत्र में दर्ज कराई हैं।

विपक्षी दलों ने दिखाई साझा रणनीति
जयराम रमेश के अनुसार, 8 जून 2026 को आयोजित इंडिया गठबंधन की बैठक में कई प्रमुख विपक्षी नेताओं ने हिस्सा लिया था। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और एनसीपी (शरद पवार गुट) की नेता सुप्रिया सुले सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि बैठक में शामिल नहीं होने वाले कुछ दल, जिनमें आम आदमी पार्टी और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम भी शामिल हैं, बाद में इस संयुक्त पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए सहमत हुए। विपक्षी गठबंधन ने भविष्य में नियमित अंतराल पर बैठकें आयोजित करने का भी निर्णय लिया है, जिसकी अगली बैठक अगस्त में हैदराबाद में प्रस्तावित है।
एसआईआर प्रक्रिया को लेकर क्या है विवाद
निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूचियों को अद्यतन और अधिक सटीक बनाने के उद्देश्य से विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया शुरू की थी। आयोग के अनुसार, इस पहल का मकसद चुनावी सूची में मौजूद त्रुटियों को दूर करना और निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता को मजबूत करना है। बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले इस प्रक्रिया का पायलट चरण लागू किया गया था। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस अभियान के दौरान देशभर में बड़ी संख्या में मतदाता प्रविष्टियों की समीक्षा की गई और कई नाम हटाए गए। फिलहाल यह प्रक्रिया कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जारी है।
आरोप और सरकार का पक्ष
विपक्षी दलों का आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने की आशंका है, जिससे चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर उन्होंने न्यायपालिका से हस्तक्षेप की मांग की है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य केवल पात्र मतदाताओं की सूची सुनिश्चित करना और अवैध रूप से दर्ज नामों की पहचान करना है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि किसी भी वास्तविक भारतीय नागरिक का नाम अनुचित तरीके से मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा और पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत संचालित की जा रही है।
न्यायालय की टिप्पणी भी बनी चर्चा का विषय
इस मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय ने हाल ही में कहा है कि निर्वाचन आयोग को विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया संचालित करने का वैधानिक अधिकार प्राप्त है। अदालत ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण को चुनौती देने वाली आपत्तियों पर विचार करते हुए आयोग की प्रक्रिया को जारी रखने की अनुमति दी। इसके बावजूद विपक्षी दलों का कहना है कि प्रक्रिया के क्रियान्वयन से जुड़े कुछ पहलुओं पर न्यायिक निगरानी आवश्यक है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस विषय पर कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा जारी रहने की संभावना है।