Crop Insurance – कमजोर मानसून के बीच किसानों को मिली फसल बीमा और वैकल्पिक खेती की सलाह
Crop Insurance – मानसून की धीमी प्रगति और सामान्य से काफी कम वर्षा को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए नई सलाह जारी की है। विभाग का कहना है कि इस बार मौसम की अनिश्चितता के कारण खरीफ फसलों पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है। अब तक सामान्य औसत की तुलना में लगभग 56 प्रतिशत कम बारिश दर्ज होने से प्रदेश के अधिकांश जिले प्रभावित हैं। ऐसे में किसानों से 31 जुलाई तक अधिसूचित खरीफ फसलों का बीमा कराने की अपील की गई है, ताकि मौसम संबंधी जोखिम की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा मिल सके।

कम प्रीमियम पर उपलब्ध है फसल बीमा
कृषि विभाग के अनुसार किसान निर्धारित समयसीमा के भीतर केवल दो प्रतिशत प्रीमियम जमा कर अपनी अधिसूचित खरीफ फसलों का बीमा करा सकते हैं। विभाग का मानना है कि बदलते मौसम और वर्षा की अनिश्चित स्थिति को देखते हुए फसल बीमा किसानों के लिए सुरक्षा कवच का काम करेगा। अधिकारियों ने किसानों से समय रहते योजना का लाभ उठाने और संबंधित कृषि कार्यालयों से आवश्यक जानकारी प्राप्त करने की भी सलाह दी है।
वर्षा की स्थिति के अनुसार फसल चयन की सलाह
जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि जिन क्षेत्रों में सिंचाई के पर्याप्त साधन उपलब्ध हैं, वहीं धान की खेती को प्राथमिकता दी जाए। वर्षा आधारित क्षेत्रों में किसानों को कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों का चयन करने की सलाह दी गई है। विभाग ने श्रीअन्न, मक्का, उड़द, मूंग, तिल और अरहर जैसी फसलों को बेहतर विकल्प बताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे विकल्प कम वर्षा की स्थिति में भी अपेक्षाकृत बेहतर उत्पादन देने में सक्षम हो सकते हैं।
धान की खेती के लिए विशेष दिशा-निर्देश
कृषि विशेषज्ञों ने धान की खेती करने वाले किसानों को खेतों में पर्याप्त जल संरक्षण के उपाय अपनाने की सलाह दी है। रोपाई वाले खेतों में ऊंची मेड़ बनाने से वर्षा जल को अधिक समय तक रोका जा सकता है। साथ ही नर्सरी में पानी का अत्यधिक ठहराव न होने देने पर भी जोर दिया गया है। कम पानी में बेहतर उत्पादन के लिए धान की सीधी बुआई (DSR) पद्धति अपनाने तथा कम अवधि में तैयार होने वाली किस्मों का चयन करने की सलाह दी गई है। रोपाई के दौरान 20 से 25 दिन की पौध का उपयोग करने और निर्धारित गहराई पर पौधे लगाने की भी सिफारिश की गई है।
सूखा सहनशील फसलों और सूक्ष्म सिंचाई पर जोर
आकस्मिक फसल योजना के तहत विभाग ने कम पानी में अच्छी पैदावार देने वाली और सूखे का सामना करने में सक्षम फसलों को बढ़ावा देने की बात कही है। ज्वार, बाजरा, सावां, कोदो और रागी जैसी श्रीअन्न फसलें सीमित वर्षा में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं और इनमें रोग तथा कीटों का प्रकोप अपेक्षाकृत कम रहता है। दलहनी फसलों में अरहर की बुआई मेड़ या रिज बनाकर करने की सलाह दी गई है, जिससे वर्षा जल का बेहतर उपयोग हो सके। इसके साथ ही ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों तथा मक्का के साथ अरहर या मूंग की मिश्रित खेती अपनाने की भी सिफारिश की गई है।