EarthquakeSafety – उत्तराखंड के शहरों में भवनों की भूकंप सुरक्षा का होगा व्यापक आकलन
EarthquakeSafety – उत्तराखंड में भूकंप के संभावित खतरे को देखते हुए शहरी क्षेत्रों में भवनों की सुरक्षा का व्यवस्थित आकलन करने की तैयारी शुरू हो गई है। इस दिशा में लोक निर्माण विभाग और अन्य संबंधित विभागों के इंजीनियरों को केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI), रुड़की के माध्यम से विशेष प्रशिक्षण देने की योजना बनाई गई है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद विशेषज्ञों की टीम विभिन्न शहरों में भवनों की भूकंप सहन क्षमता का अध्ययन करेगी और आवश्यक सुझाव भी तैयार करेगी।

संवेदनशील शहरों की रिपोर्ट बनी आधार
इस पहल की पृष्ठभूमि में CBRI द्वारा पहले किए गए अध्ययन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संस्थान ने नैनीताल, मसूरी और कर्णप्रयाग में भूकंप जोखिम का विस्तृत मूल्यांकन किया था। रिपोर्ट में इन तीनों शहरों को भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील बताया गया था। इसी अनुभव के आधार पर अब राज्य के अन्य शहरी क्षेत्रों में भी इसी तरह का सर्वे कराने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
इंजीनियरों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
हाल ही में सचिव, आपदा प्रबंधन की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में इस योजना पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में तय किया गया कि CBRI विशेषज्ञों की मदद से लोक निर्माण विभाग सहित अन्य विभागों के इंजीनियरों को भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा का आकलन करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षित अधिकारी और इंजीनियर बाद में छोटे और मध्यम शहरों में जाकर भवनों की स्थिति का अध्ययन करेंगे, जिससे भविष्य की योजनाओं के लिए विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध हो सकें।
भूकंप रोधी निर्माण पर रहेगा जोर
बैठक में केवल सर्वेक्षण तक ही सीमित रहने के बजाय लोगों के बीच सुरक्षित निर्माण तकनीकों को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर भी सहमति बनी। अधिकारियों का मानना है कि नए भवनों के निर्माण के दौरान भूकंप रोधी मानकों का पालन किया जाए तो संभावित आपदाओं के दौरान नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से आम नागरिकों और निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों को भी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने की योजना बनाई जा रही है।
अन्य शहरों में भी चरणबद्ध तरीके से होगा कार्य
राज्य के शेष बड़े शहरों में यह अभियान राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) से वित्तीय सहायता मिलने के बाद शुरू किया जाएगा। सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने बताया कि क्षमता विकास से जुड़े कार्यों का समन्वय आपदा प्रबंधन विभाग करेगा, जबकि सर्वेक्षण और तकनीकी गतिविधियों को संबंधित विभाग अपने स्तर पर आगे बढ़ाएंगे। सरकार का उद्देश्य भविष्य में भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए वैज्ञानिक और योजनाबद्ध तैयारी सुनिश्चित करना है।