ElectionStrategy – भाजपा ने चार चुनौतीपूर्ण सीटों पर बढ़ाई चुनावी तैयारियां
ElectionStrategy – उत्तराखंड में लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी अब उन विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रही है, जहां उसे अब तक चुनावी सफलता नहीं मिल सकी है। लगातार तीसरी बार प्रदेश में अपनी राजनीतिक बढ़त मजबूत करने की रणनीति के तहत पार्टी ने चार ऐसी सीटों पर संगठनात्मक गतिविधियां तेज कर दी हैं, जिन्हें अब तक जीत में नहीं बदला जा सका है। इन क्षेत्रों में वरिष्ठ नेताओं की सक्रिय तैनाती के साथ जमीनी स्तर पर तैयारियों को गति दी जा रही है।

चार सीटों पर विशेष रणनीति लागू
पार्टी ने चकराता, पिरान कलियर, मंगलौर और धारचूला विधानसभा क्षेत्रों के लिए अलग रणनीति तैयार की है। इन सभी सीटों पर प्रदेश कोर कमेटी के वरिष्ठ सदस्यों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो चुनाव तक स्थानीय संगठन और अभियान की निगरानी करेंगे। इसके साथ ही बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं के समन्वय को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि प्रत्येक मतदाता तक प्रभावी संपर्क स्थापित किया जा सके।
बूथ स्तर पर बढ़ाया गया संगठन का फोकस
सूत्रों के अनुसार, माइक्रो मैनेजमेंट के तहत बूथ, मंडल, विभिन्न प्रकोष्ठों, मोर्चों और अन्य संगठनात्मक इकाइयों के बीच तालमेल को मजबूत किया गया है। पार्टी का उद्देश्य स्थानीय कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करते हुए चुनावी अभियान को अधिक प्रभावी बनाना है। इन सभी विधानसभा क्षेत्रों की गतिविधियों की निगरानी प्रदेश मुख्यालय स्तर से भी की जा रही है।
उम्मीदवार चयन में सभी पहलुओं पर नजर
संगठन केवल प्रचार अभियान तक सीमित नहीं है, बल्कि संभावित उम्मीदवारों के चयन को लेकर भी आंतरिक स्तर पर विभिन्न समीकरणों का आकलन किया जा रहा है। पार्टी स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों, जनाधार और जीत की संभावनाओं के आधार पर उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है। साथ ही, जिन सीटों पर मुकाबला बहुकोणीय होने की संभावना है, वहां विपक्षी दलों के साथ अन्य संभावित उम्मीदवारों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है।
इन सीटों पर अब तक नहीं मिली जीत
चकराता विधानसभा सीट पर वर्ष 2002 से 2022 तक हुए सभी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के प्रीतम सिंह लगातार विजयी रहे हैं। वहीं, परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई पिरान कलियर सीट पर 2012, 2017 और 2022 के चुनावों में कांग्रेस के फुरकान अहमद ने लगातार जीत दर्ज की है।
मंगलौर और धारचूला भी चुनौती बने हुए
मंगलौर विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास भी भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। वर्ष 2002, 2007 और 2012 में यह सीट बहुजन समाज पार्टी के पास रही। 2017 में कांग्रेस ने यहां जीत हासिल की, 2022 में फिर बसपा ने कब्जा किया और 2024 के उपचुनाव के बाद यह सीट दोबारा कांग्रेस के खाते में चली गई। दूसरी ओर, धारचूला सीट पर 2002 और 2007 में निर्दलीय उम्मीदवार गगन सिंह रजवार विजयी रहे, जबकि 2012, 2017 और 2022 में कांग्रेस के हरीश धामी ने जीत दर्ज की। वर्ष 2014 के उपचुनाव में भी भाजपा को यहां सफलता नहीं मिल सकी थी।