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ICC – महिला क्रिकेटरों की वापसी आसान बनाने को लागू हुई नई मातृत्व नीति

ICC – अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने महिला क्रिकेट को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। बोर्ड ने गर्भावस्था के बाद खिलाड़ियों की सुरक्षित और व्यवस्थित वापसी सुनिश्चित करने के लिए नया ‘सिक्स-आर फ्रेमवर्क’ लागू किया है। इस पहल का उद्देश्य महिला क्रिकेटरों को यह भरोसा देना है कि मातृत्व उनके खेल करियर में रुकावट नहीं बनेगा। नई नीति को क्रिकेट जगत की कई प्रमुख हस्तियों और खिलाड़ियों का समर्थन भी मिला है।

छह चरणों में होगी मैदान पर वापसी की तैयारी

ICC की नई व्यवस्था ‘सिक्स-आर फ्रेमवर्क’ छह अलग-अलग चरणों पर आधारित है। इसमें तैयारी, समीक्षा, शारीरिक पुनर्स्थापना, दोबारा फिटनेस हासिल करना, प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में वापसी और प्रदर्शन में निरंतर सुधार जैसे चरण शामिल किए गए हैं।

इस ढांचे के जरिए सदस्य देशों के क्रिकेट बोर्ड खिलाड़ियों की शारीरिक और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उनकी वापसी की योजना तैयार कर सकेंगे। इसका उद्देश्य जल्दबाजी से बचते हुए सुरक्षित तरीके से क्रिकेट में वापसी सुनिश्चित करना है।

सचिन तेंदुलकर ने की पहल की सराहना

पूर्व भारतीय क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने भी इस नई नीति का स्वागत किया है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि खेलों में वास्तविक सशक्तिकरण का अर्थ यह है कि खिलाड़ियों को उनके करियर के हर महत्वपूर्ण पड़ाव पर आवश्यक सहयोग और बेहतर व्यवस्था मिले।

उन्होंने कहा कि यह पहल महिला खिलाड़ियों को मातृत्व और पेशेवर क्रिकेट के बीच संतुलन बनाने का अवसर देगी। उनके अनुसार, यह कदम दुनिया भर की महिला क्रिकेटरों के भविष्य के लिए सकारात्मक बदलाव साबित हो सकता है।

मेडिकल समिति ने बताया नीति का उद्देश्य

ICC की मेडिकल सलाहकार समिति की सदस्य डॉ. फिलिपा इंगे ने कहा कि इस नीति का मुख्य उद्देश्य खिलाड़ियों को यह विश्वास दिलाना है कि मां बनने के बाद भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सफल वापसी संभव है।

उन्होंने बताया कि यह फ्रेमवर्क सदस्य देशों को स्पष्ट दिशा-निर्देश उपलब्ध कराएगा, जिससे वे खिलाड़ियों की जरूरतों के अनुसार उन्हें उचित सहयोग दे सकें। उनका मानना है कि मातृत्व को किसी भी खिलाड़ी के करियर का अंतिम पड़ाव नहीं माना जाना चाहिए।

खिलाड़ियों ने भी जताया समर्थन

इंग्लैंड की अनुभवी बल्लेबाज हीदर नाइट ने इस पहल को महिला क्रिकेट के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे दिशा-निर्देश खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ाते हैं और उन्हें परिवार तथा करियर दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ने का भरोसा देते हैं।

आयरलैंड की पूर्व क्रिकेटर इसोबेल जॉयस ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि गर्भावस्था के बाद वापसी के दौरान शारीरिक, मानसिक और व्यावहारिक चुनौतियां सामने आती हैं। वहीं वेस्टइंडीज की खिलाड़ी एफी फ्लेचर ने कहा कि परिवार बसाने के बाद दोबारा मैदान पर लौट पाना किसी भी खिलाड़ी के लिए बेहद संतोषजनक अनुभव होता है और ऐसी नीतियां इस प्रक्रिया को आसान बनाती हैं।

महिला क्रिकेट के लिए अहम पहल

क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि ICC की यह नीति महिला खिलाड़ियों के लिए दीर्घकालिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इससे खिलाड़ियों को परिवार और पेशेवर खेल के बीच कठिन चुनाव करने की मजबूरी कम होगी। साथ ही सदस्य देशों के क्रिकेट बोर्ड भी मातृत्व के बाद खिलाड़ियों की वापसी के लिए एक समान और व्यवस्थित प्रक्रिया अपना सकेंगे।

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