ScreenTime – आंखों पर बुरा असर डाल सकती है लगातार रील्स देखने की आदत
ScreenTime – आज के समय में मोबाइल पर रील्स और छोटे वीडियो देखना लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। बच्चे हों, युवा हों या बुजुर्ग, बड़ी संख्या में लोग अपना खाली समय स्क्रीन के सामने बिताते हैं। हालांकि यह मनोरंजन का आसान माध्यम है, लेकिन लंबे समय तक लगातार मोबाइल स्क्रीन पर नजरें टिकाए रखने से आंखों की सेहत प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ता स्क्रीन टाइम आंखों से जुड़ी कई परेशानियों को जन्म दे सकता है, इसलिए डिजिटल उपकरणों का संतुलित उपयोग बेहद जरूरी है।

लगातार स्क्रीन देखने से बढ़ सकती हैं आंखों की समस्याएं
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक मोबाइल या टैबलेट का इस्तेमाल करने से आंखों की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसका परिणाम आंखों में थकान, भारीपन और असहजता के रूप में सामने आ सकता है। कई लोगों को स्क्रीन देखने के बाद आंखों में चुभन या जलन की शिकायत भी होती है, जो लगातार बढ़ते स्क्रीन टाइम का संकेत हो सकती है।
कम पलक झपकाने से हो सकती है ड्राईनेस
जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक वीडियो या रील्स देखता है तो उसकी पलक झपकाने की दर सामान्य से कम हो जाती है। इससे आंखों की प्राकृतिक नमी प्रभावित होती है और सूखापन बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में आंखों में खुजली, जलन और लालिमा जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं।
धुंधला दिखना और सिरदर्द भी हो सकता है कारण
लंबे समय तक स्क्रीन पर फोकस बनाए रखने से कुछ लोगों को अस्थायी रूप से धुंधला दिखाई देने लगता है। इसके साथ ही आंखों के आसपास दर्द, सिरदर्द और एकाग्रता में कमी जैसी दिक्कतें भी महसूस हो सकती हैं। लगातार स्क्रीन इस्तेमाल करने वाले लोगों में यह समस्या अपेक्षाकृत अधिक देखी जाती है।
नींद की गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है प्रभाव
मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी शरीर के प्राकृतिक नींद चक्र को प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि देर रात तक रील्स या वीडियो देखने की आदत नींद आने में देरी और नींद की गुणवत्ता में गिरावट का कारण बन सकती है। पर्याप्त और अच्छी नींद न मिलने का असर आंखों सहित संपूर्ण स्वास्थ्य पर पड़ता है।
आंखों को सुरक्षित रखने के लिए अपनाएं ये उपाय
आंखों को आराम देने के लिए 20-20-20 नियम को उपयोगी माना जाता है। इसके तहत हर 20 मिनट बाद करीब 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखना चाहिए। इससे आंखों पर पड़ने वाला तनाव कम हो सकता है।
इसके अलावा, मोबाइल या अन्य डिजिटल उपकरणों के उपयोग की अवधि तय करना भी लाभदायक माना जाता है। लगातार घंटों तक रील्स देखने के बजाय बीच-बीच में स्क्रीन से दूरी बनाना आंखों को राहत देता है।
पर्याप्त पानी और सही रोशनी का रखें ध्यान
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा बनाए रखना भी आंखों की नमी को बनाए रखने में मदद करता है। वहीं मोबाइल का इस्तेमाल बहुत अंधेरे या अत्यधिक तेज रोशनी वाले वातावरण में करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे आंखों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
एक दिन में कितना स्क्रीन टाइम उचित माना जाता है
विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार 2 से 12 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम सीमित रखना चाहिए और इसे 1 से 2 घंटे के भीतर रखने की कोशिश करनी चाहिए। किशोरों के लिए मनोरंजन संबंधी स्क्रीन उपयोग 2 से 3 घंटे तक उचित माना जाता है। वयस्कों के मामले में कामकाजी जरूरतों को छोड़कर लगातार कई घंटों तक स्क्रीन देखने से बचने की सलाह दी जाती है।
नियमित ब्रेक लेना है सबसे अहम
विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि मोबाइल का उपयोग पूरी तरह बंद करना संभव नहीं है, लेकिन इसके बीच नियमित अंतराल पर ब्रेक लेना बेहद जरूरी है। हर घंटे के बाद 5 से 10 मिनट का विराम आंखों को आराम देने और लंबे समय तक उनकी सेहत बनाए रखने में मदद कर सकता है।