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ParliamentPolitics – जयराम रमेश ने केंद्र पर लगाए दल-बदल बढ़ाने के आरोप

ParliamentPolitics – कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर विपक्षी दलों को कमजोर करने के उद्देश्य से राजनीतिक दबाव और दल-बदल की रणनीति अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री विपक्षी एकजुटता को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। रमेश ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) पर कटाक्ष करते हुए उसे “नेशनल डिफेक्टर अलायंस” करार दिया और दावा किया कि विपक्षी दलों में टूट पैदा करने के प्रयास लगातार तेज किए जा रहे हैं।

लोकसभा मतदान का किया उल्लेख

अपने बयान में जयराम रमेश ने 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में हुई महत्वपूर्ण मतदान प्रक्रिया का जिक्र किया। उस दिन सरकार ने संविधान संशोधन विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक सदन में पेश किए थे। संविधान संशोधन विधेयक पर हुई वोटिंग में सरकार को अपेक्षित दो-तिहाई समर्थन नहीं मिल सका। सरकार के पक्ष में 298 सांसदों ने मतदान किया, जबकि 230 सदस्यों ने विरोध में वोट डाला। रमेश का कहना है कि इस परिणाम के बाद सरकार की चिंता बढ़ गई है और इसी वजह से राजनीतिक समीकरण बदलने की कोशिशें तेज हुई हैं।

विपक्ष का मनोबल तोड़ने की कोशिश का आरोप

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि आवश्यक संख्या हासिल नहीं कर पाने के बाद केंद्र सरकार अब अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं और सांसदों को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार, मानसून सत्र से पहले संसद में संख्या बल बढ़ाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की एकजुटता ने पहले भी सरकार की योजनाओं को चुनौती दी है और आगे भी यही स्थिति बनी रहेगी। रमेश ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक मूल्यों पर दबाव बनाने की कोशिशें की जा रही हैं।

राज्यसभा को लेकर भी उठाए सवाल

जयराम रमेश ने राज्यसभा से जुड़े घटनाक्रमों पर भी चिंता जताई। उनका आरोप है कि कुछ सांसदों पर इस्तीफा देने और राजनीतिक पक्ष बदलने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल इन परिस्थितियों के बावजूद एकजुट हैं और सरकार को दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में सफलता नहीं मिलेगी। कांग्रेस नेता ने विश्वास जताया कि विपक्ष संसद के भीतर और बाहर अपनी भूमिका मजबूती से निभाता रहेगा।

इंडिया गठबंधन की बैठक से मिला उत्साह

हाल ही में 8 जून को इंडिया गठबंधन की बैठक आयोजित हुई थी, जिसमें 23 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस बैठक के बाद विपक्षी खेमे में उत्साह बढ़ा है। नेताओं का मानना है कि विभिन्न दलों के बीच समन्वय और सहयोग पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुआ है, जिससे आगामी राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलेगी।

महाराष्ट्र में बढ़ी राजनीतिक गतिविधियां

महाराष्ट्र की राजनीति में भी इन दिनों हलचल तेज है। ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। खबरों के अनुसार, उद्धव ठाकरे गुट के कुछ सांसदों के एकनाथ शिंदे खेमे के संपर्क में होने की अटकलें लगाई जा रही हैं। विधान परिषद सदस्य चंद्रकांत रघुवंशी ने दावा किया है कि छह सांसद शिंदे गुट के साथ जाने का निर्णय ले चुके हैं। हालांकि, इस संबंध में संबंधित दल की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

पश्चिम बंगाल में भी सियासी घटनाक्रम तेज

पश्चिम बंगाल में भी राजनीतिक गतिविधियां चर्चा में हैं। जानकारी के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस से जुड़े 20 बागी सांसदों ने 14 जून को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। बताया गया है कि उन्होंने अपने समूह के विलय को लेकर त्रिपुरा आधारित पार्टी नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के पक्ष में एक पत्र सौंपा है। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दिया है और आने वाले दिनों में इसके असर पर नजर बनी हुई है।

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