ChildLabour – गुजरात में बाल मजदूरी के खिलाफ अभियान, 84 बच्चों को मिली राहत
ChildLabour – गुजरात में बाल मजदूरी पर रोक लगाने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पहले दो सप्ताह में 84 बच्चों को श्रम से मुक्त कराया है। राज्यभर में संचालित इस अभियान के दौरान 26 लोगों के खिलाफ विभिन्न मामलों में कानूनी कार्रवाई भी दर्ज की गई है। अधिकारियों का कहना है कि यह पहल केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों को सुरक्षित माहौल और शिक्षा से जोड़ने पर भी समान रूप से ध्यान दिया जा रहा है।

राज्य सरकार की निगरानी में चल रहे इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा पढ़ाई छोड़कर मजदूरी करने के लिए मजबूर न हो। इसके लिए औद्योगिक क्षेत्रों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और असंगठित कार्यस्थलों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
सूरत की फैक्ट्री में दो बच्चों को कराया गया मुक्त
अभियान के दौरान सूरत जिले के कामरेज क्षेत्र में पुलिस को एक वस्त्र इकाई में नाबालिग बच्चों से काम कराए जाने की सूचना मिली। जांच के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दो बच्चों को वहां से मुक्त कराया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि दोनों बच्चों से लंबे समय तक काम लिया जा रहा था और उन्हें बेहद कम पारिश्रमिक दिया जा रहा था।
अधिकारियों के अनुसार, बच्चों को प्रतिदिन लगभग 11 घंटे तक काम करना पड़ता था। उन्हें सुबह से शाम तक काम पर रखा जाता था और बीच में सीमित समय का विश्राम दिया जाता था। पुलिस ने बच्चों को सुरक्षित संरक्षण में भेजते हुए संबंधित प्रतिष्ठान के संचालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
शोषण की आशंका पर गहन जांच
जांच में यह भी सामने आया कि बच्चों को उनकी इच्छा के विरुद्ध काम जारी रखने के लिए दबाव का सामना करना पड़ा था। अधिकारियों का मानना है कि ऐसे मामलों में केवल श्रम कानूनों का उल्लंघन ही नहीं, बल्कि बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए प्रत्येक मामले की विस्तार से जांच की जा रही है ताकि जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उचित कार्रवाई की जा सके।
जागरूकता और पुनर्वास पर भी जोर
पुलिस महानिदेशक जी.एस. मलिक ने बताया कि अभियान के शुरुआती 14 दिनों में बचाए गए बच्चों में से 67 का पुनर्वास भी किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि बच्चों को मजदूरी से मुक्त कराने के बाद उन्हें शिक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाओं से जोड़ना इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अधिकारियों के अनुसार, राज्यभर में अब तक 160 से अधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को बाल मजदूरी के दुष्परिणामों और कानूनी प्रावधानों के बारे में जानकारी दी जा रही है, ताकि समाज स्तर पर भी इस समस्या को कम किया जा सके।
कई क्षेत्रों से सामने आए मामले
सीआईडी क्राइम की महिला इकाई से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि बाल मजदूरी के मामले वस्त्र उद्योग, होटल, राइस मिल और अन्य छोटे औद्योगिक प्रतिष्ठानों से सामने आए हैं। जांच में यह भी पता चला है कि कई बच्चे दूसरे राज्यों से आए प्रवासी परिवारों से जुड़े थे। इससे बच्चों के अवैध श्रम नेटवर्क और संभावित मानव तस्करी से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
चार चरणों में चल रहा अभियान
अधिकारियों के अनुसार, इस विशेष अभियान को चार चरणों में लागू किया गया है। पहले चरण में संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और स्कूल छोड़ चुके बच्चों का पता लगाया जा रहा है। दूसरे चरण में निरीक्षण और बचाव अभियान चलाए जा रहे हैं। तीसरे चरण में बच्चों के पुनर्वास और शिक्षा से जुड़ाव पर काम किया जाएगा, जबकि अंतिम चरण में दोषियों और उनसे जुड़े नेटवर्क के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस का लक्ष्य राज्यभर में हजारों स्थानों की जांच कर बाल मजदूरी से जुड़े संगठित तंत्र की पहचान करना और अधिक से अधिक बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है।