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Forgery Case – हस्ताक्षर विवाद में अभिषेक बनर्जी को हाईकोर्ट से मिली अंतरिम राहत

Forgery Case – तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी को कथित हस्ताक्षर जालसाजी से जुड़े मामले में फिलहाल राहत मिल गई है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान उनके खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक या कठोर कार्रवाई पर अस्थायी रोक लगाने का आदेश दिया है। अदालत के इस फैसले से उन्हें तत्काल कानूनी संरक्षण मिला है, जबकि मामले की जांच प्रक्रिया जारी रहेगी।

अदालत ने जांच में सहयोग करने को कहा

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को निर्देश दिया कि वे 11 जून को शाम छह बजे तक पश्चिम बंगाल सीआईडी के समक्ष उपस्थित हों। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसी अपना काम जारी रख सकती है, लेकिन अगली सुनवाई तक सांसद के खिलाफ कोई जबरन कदम नहीं उठाया जाएगा। न्यायालय का उद्देश्य जांच और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना बताया जा रहा है।

पक्षों की दलीलों पर हुई सुनवाई

मामले की सुनवाई के दौरान अभिषेक बनर्जी की ओर से अदालत में कहा गया कि उन पर लगाए गए आरोप तथ्यात्मक आधार से रहित हैं। उनकी तरफ से यह भी तर्क रखा गया कि उन्हें राजनीतिक कारणों से इस मामले में घसीटा जा रहा है। दूसरी ओर, मामले से जुड़े पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें अदालत के सामने प्रस्तुत कीं, जिसके बाद न्यायालय ने अंतरिम संरक्षण देने का निर्णय लिया।

पहले नोटिस पर मांगा था अतिरिक्त समय

इस प्रकरण में इससे पहले भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया था। पश्चिम बंगाल पुलिस की सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया था। इसके जवाब में उन्होंने 8 जून को एजेंसी को लिखित प्रतिक्रिया भेजकर पेश होने के लिए कुछ अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया था। उन्होंने तत्काल उपस्थिति दर्ज कराने में असमर्थता जताते हुए नई तारीख तय करने की मांग की थी।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद

हस्ताक्षर जालसाजी का यह मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा से जुड़े कुछ दस्तावेजों को लेकर सामने आया था। आरोप है कि विधानसभा में जमा किए गए कुछ आधिकारिक कागजात पर कई विधायकों के हस्ताक्षर वास्तविक नहीं थे। इस संबंध में तृणमूल कांग्रेस के कुछ विधायकों ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद जांच की प्रक्रिया शुरू हुई।

अगली सुनवाई पर रहेगी नजर

हाईकोर्ट ने फिलहाल केवल अंतरिम राहत प्रदान की है और मामले के तथ्यों पर अंतिम टिप्पणी नहीं की है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जांच एजेंसियां कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना काम जारी रखेंगी। अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर होगी, जहां मामले की प्रगति और आगे की कानूनी दिशा तय हो सकती है।

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