अंतर्राष्ट्रीय

PeaceMission – लेबनान में शांति और पुनर्निर्माण पर मेजर बराक का जोर

PeaceMission – लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के तहत तैनात भारतीय सेना की अधिकारी मेजर अभिलाषा बराक ने युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए संवाद और कूटनीतिक प्रयासों की अहमियत पर बल दिया है। उनका कहना है कि किसी भी संघर्षग्रस्त समाज को सामान्य स्थिति में लौटाने के लिए केवल युद्धविराम पर्याप्त नहीं होता, बल्कि लगातार बातचीत और विश्वास बहाली की प्रक्रिया भी उतनी ही आवश्यक होती है।

एक संवाद कार्यक्रम के दौरान मेजर बराक ने कहा कि यदि युद्धविराम कायम रहता है और विभिन्न पक्षों के बीच बातचीत आगे बढ़ती है, तो प्रभावित समुदायों के पुनर्निर्माण का मार्ग और मजबूत होगा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि युद्ध के बाद पुनर्वास केवल भवनों, सड़कों और सार्वजनिक ढांचे तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि लोगों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

संघर्ष के बाद समाज को संभालने की चुनौती

मेजर बराक के अनुसार, लंबे समय तक चले संघर्ष का असर केवल भौतिक संपत्तियों पर नहीं पड़ता, बल्कि लोगों के मनोबल और सामाजिक जीवन पर भी गहरा प्रभाव छोड़ता है। ऐसे में पुनर्निर्माण की प्रक्रिया में मनोवैज्ञानिक सहायता, सामाजिक सहयोग और सामुदायिक भागीदारी को शामिल करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि युद्ध से प्रभावित परिवारों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को फिर से सामान्य जीवन की ओर लौटाने के लिए व्यापक स्तर पर सहयोगात्मक प्रयासों की आवश्यकता होती है। इसी दिशा में संयुक्त राष्ट्र मिशन विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय समुदायों के साथ जुड़कर काम कर रहा है।

संयुक्त राष्ट्र ने किया योगदान का सम्मान

मेजर अभिलाषा बराक को हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की ओर से वर्ष 2025 का “Military Gender Advocate of the Year” सम्मान प्रदान किया गया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने उनके कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने महिलाओं और युवतियों तक पहुंच बनाकर शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास से जुड़े कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया है।

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, मेजर बराक ने स्थानीय स्तर पर विश्वास निर्माण और सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके प्रयासों से कई महिलाओं को नए अवसर प्राप्त हुए और सामाजिक विकास से जुड़ी पहल को मजबूती मिली।

महिलाओं और युवाओं पर विशेष फोकस

लेबनान में अपनी जिम्मेदारियों के दौरान मेजर बराक ने महिलाओं और किशोरियों के साथ सीधे संवाद को प्राथमिकता दी। उनका मानना है कि कई परिस्थितियों में स्थानीय महिलाएं महिला अधिकारियों के साथ अधिक सहज महसूस करती हैं, जिससे उनकी समस्याओं और जरूरतों को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।

उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता, शिक्षा सहयोग और सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कई कार्यक्रमों में भागीदारी की। इन पहलों का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें आर्थिक अवसरों से जोड़ना रहा।

चुनौतीपूर्ण मिशन में निभा रहीं महत्वपूर्ण भूमिका

मेजर बराक वर्तमान में दक्षिणी लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल के साथ एंगेजमेंट टीम कमांडर और Gender Focal Point के रूप में कार्यरत हैं। यह क्षेत्र लंबे समय से तनाव और संघर्ष का केंद्र रहा है, जिसके कारण शांति सैनिकों को भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

भारतीय सेना की पहली महिला Combat Helicopter Pilot के रूप में पहचान रखने वाली मेजर बराक ने पहले Air Traffic Controller की भूमिका भी निभाई है। संयुक्त राष्ट्र मिशन में उनका कार्य न केवल शांति स्थापना बल्कि सामाजिक समावेशन और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए भी उल्लेखनीय माना जा रहा है।

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