SupremeCourt – यूएपीए मामले में सुहैल थोकर को मिली जमानत
SupremeCourt – सुप्रीम कोर्ट ने कश्मीर से जुड़े एक कथित आतंकी साजिश मामले में आरोपी सुहैल अहमद थोकर को राहत देते हुए जमानत मंजूर कर ली है। यह फैसला न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनाया। आरोपी को राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम और अन्य आपराधिक धाराओं के तहत गिरफ्तार किया था। अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान हिरासत की अवधि और ट्रायल में लगने वाले समय को महत्वपूर्ण आधार माना।

सुहैल अहमद थोकर अक्टूबर 2021 से जेल में बंद था। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि आरोपी लंबे समय से हिरासत में है और मामले का अंतिम निपटारा होने में अभी काफी समय लग सकता है। इसी को देखते हुए अदालत ने सशर्त जमानत देने का फैसला सुनाया।
जमानत के साथ रखी गई सख्त शर्तें
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि आरोपी को दी गई राहत कुछ निर्धारित शर्तों के अधीन होगी। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन पाया गया तो राहत तुरंत वापस ली जा सकती है। ऐसी स्थिति में आरोपी को दोबारा जांच एजेंसी की हिरासत में भेजा जाएगा।
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत का फैसला मामले के गुण-दोष पर अंतिम टिप्पणी नहीं माना जाएगा। अदालत केवल इस पहलू पर विचार कर रही थी कि आरोपी लंबे समय से जेल में है और मुकदमे की प्रक्रिया फिलहाल लंबी दिखाई दे रही है।
हाईकोर्ट के फैसले को दी गई थी चुनौती
यह मामला उस अपील के जरिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने सितंबर 2023 में आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। उस समय अदालत ने कहा था कि शुरुआती तौर पर आरोप गंभीर दिखाई देते हैं और यूएपीए कानून के तहत जमानत देने की आवश्यक शर्तें पूरी नहीं होतीं।
अब सुप्रीम कोर्ट ने परिस्थितियों और हिरासत की अवधि को ध्यान में रखते हुए अलग दृष्टिकोण अपनाया है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक ट्रायल लंबित रहने की स्थिति में अदालतें व्यक्तिगत स्वतंत्रता के पहलू पर भी विचार करती हैं।
एनआईए ने लगाए थे गंभीर आरोप
जांच एजेंसी के अनुसार, सुहैल अहमद थोकर उन लोगों में शामिल था जिन पर जम्मू-कश्मीर में युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रभावित करने और आतंकी गतिविधियों के लिए प्रेरित करने का आरोप लगाया गया था। एजेंसी का दावा था कि यह नेटवर्क पाकिस्तान में बैठे आतंकी संचालकों और भारत में सक्रिय ओवरग्राउंड सहयोगियों के माध्यम से काम कर रहा था।
एनआईए ने अपनी जांच में कई प्रतिबंधित संगठनों के नाम भी शामिल किए थे। एजेंसी के मुताबिक, इन संगठनों का उद्देश्य युवाओं की भर्ती करना और उन्हें हथियारों तथा विस्फोटकों के इस्तेमाल का प्रशिक्षण देना था। जांच में यह भी कहा गया कि जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को दोबारा सक्रिय करने की कोशिश की जा रही थी।
चार्जशीट में कई आरोपी शामिल
जांच एजेंसी ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने कथित रूप से कुछ आतंकियों को शरण और अन्य सहायता उपलब्ध कराई। इसी आधार पर उसे अक्टूबर 2021 में गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में दाखिल चार्जशीट में कुल 25 लोगों को आरोपी बनाया गया है।
मामले की सुनवाई अभी जारी है और आने वाले समय में अदालत में कई अन्य पहलुओं पर बहस हो सकती है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को आरोपी के लिए बड़ी कानूनी राहत माना जा रहा है।