EnergySecurity – अदाणी ने ऊर्जा और एआई आत्मनिर्भरता पर रखा बड़ा विजन
EnergySecurity – देश की ऊर्जा क्षमता, तकनीकी विकास और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य को लेकर उद्योगपति गौतम अदाणी ने एक व्यापक दृष्टिकोण सामने रखा है। सीआईआई समिट में बोलते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले समय में किसी भी देश की वास्तविक ताकत सिर्फ आर्थिक या सैन्य क्षमता से नहीं आंकी जाएगी, बल्कि यह इस बात पर निर्भर करेगी कि वह ऊर्जा और तकनीक के मामले में कितना आत्मनिर्भर है।

उन्होंने वैश्विक हालात का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया तेजी से ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है, जहां ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ चुकी हैं। अदाणी के अनुसार, जो देश अपनी ऊर्जा व्यवस्था और तकनीकी ढांचे को मजबूत करेगा, वही भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था में नेतृत्व की भूमिका निभाएगा।
पश्चिम एशिया के घटनाक्रम का किया उल्लेख
अपने संबोधन में गौतम अदाणी ने हाल के पश्चिम एशिया तनाव और महत्वपूर्ण ढांचागत परिसंपत्तियों पर हुए हमलों का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ऊर्जा और डिजिटल नेटवर्क अब किसी भी राष्ट्र की रणनीतिक ताकत का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं।
अदाणी ने कहा कि आज की दुनिया में केवल संसाधन होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन संसाधनों पर नियंत्रण और उन्हें सुरक्षित रखने की क्षमता भी उतनी ही जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऊर्जा आपूर्ति और डिजिटल सिस्टम पर निर्भर देशों को भविष्य में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
अमेरिका और चीन की रणनीति पर टिप्पणी
गौतम अदाणी ने अपने संबोधन में अमेरिका और चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों देशों ने काफी पहले यह समझ लिया था कि तकनीक और ऊर्जा पर नियंत्रण भविष्य की सबसे बड़ी शक्ति बनने वाला है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की राजनीतिक व्यवस्थाएं अलग हैं, लेकिन आत्मनिर्भरता को लेकर उनकी रणनीति काफी स्पष्ट है।
उन्होंने कहा कि भारत को भी अपनी जरूरतों के अनुसार अलग मॉडल तैयार करना होगा। उनके मुताबिक, भारत का विकास रास्ता न तो पूरी तरह अमेरिका जैसा होगा और न ही चीन जैसा। भारत की ताकत उसकी घरेलू मांग, युवा आबादी और तेजी से बढ़ते शहरीकरण में छिपी है।
भारत की बढ़ती ऊर्जा क्षमता पर जोर
ऊर्जा क्षेत्र की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए अदाणी ने कहा कि भारत ने बीते वर्षों में बिजली उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की है। उन्होंने बताया कि मार्च 2026 तक देश 500 गीगावॉट स्थापित बिजली क्षमता के आंकड़े को पार कर चुका है। इसमें पिछले एक दशक में जोड़ी गई क्षमता का बड़ा योगदान है।
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत ऊर्जा उत्पादन को और तेजी से बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। लक्ष्य यह है कि 2047 तक देश की कुल ऊर्जा क्षमता 2000 गीगावॉट तक पहुंच सके। इसके लिए नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े स्तर पर निवेश किया जा रहा है।
एआई को अवसर के रूप में देखने की सलाह
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर चल रही वैश्विक बहस पर भी अदाणी ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि कई देशों में यह चिंता जताई जा रही है कि एआई इंसानों की नौकरियां कम कर देगा, लेकिन भारत को इसे अवसर के रूप में देखना चाहिए।
उनके अनुसार, एआई उत्पादकता बढ़ाने, नए रोजगार तैयार करने और छोटे कारोबारों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मददगार साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं के लिए यह तकनीक नए अवसरों का रास्ता खोल सकती है।
स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं पर बड़ा निवेश
अदाणी ने गुजरात के खेड़ा में विकसित हो रही बड़े स्तर की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि समूह 30 गीगावॉट क्षमता वाले एक बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है, जिसका बड़ा हिस्सा शुरू भी हो चुका है।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा परिवर्तन और क्लीन एनर्जी सेक्टर में अदाणी समूह करीब 100 अरब डॉलर निवेश करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनका मानना है कि आने वाले समय में ऊर्जा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर भारत की आर्थिक प्रगति की सबसे मजबूत नींव बनेंगे।