EducationPolicy – राइम्स विवाद पर मंत्री बोले, संस्कार आधारित शिक्षा जरूरी
हाल के दिनों में “जॉनी जॉनी यस पापा” और “रेन रेन गो अवे” जैसी राइम्स को लेकर दिए गए उनके बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। विपक्ष ने इसे अंग्रेजी विरोधी सोच से जोड़कर आलोचना की थी।
अंग्रेजी नहीं, गलत संदेश देने वाली सामग्री पर आपत्ति
योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि उन्हें अंग्रेजी भाषा से कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि आज के समय में अंग्रेजी सीखना और समझना जरूरी है, लेकिन बच्चों को पढ़ाई के माध्यम से सही संस्कार और सकारात्मक सोच भी मिलनी चाहिए।
मंत्री के अनुसार, कुछ राइम्स और सामग्री ऐसी होती हैं जिनके संदेश पर दोबारा विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व का निर्माण करना भी है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री को भेजेंगे प्रस्ताव
उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि वह इस विषय को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री को पत्र लिखने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा सामग्री की समीक्षा समय-समय पर होना जरूरी है ताकि बच्चों को बेहतर और संतुलित पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराई जा सके।
उनका कहना है कि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और जिम्मेदारी की भावना से जोड़ने वाली शिक्षा पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। मंत्री ने कहा कि इस दिशा में शिक्षकों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है।
विपक्ष पर लगाया मुद्दा भटकाने का आरोप
योगेंद्र उपाध्याय ने विपक्ष की आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के पास ठोस मुद्दे नहीं हैं, इसलिए वह शिक्षा जैसे विषय को राजनीतिक विवाद बनाने की कोशिश कर रहा है।
मंत्री ने कहा कि उन्होंने केवल संस्कार आधारित शिक्षा की बात की थी, लेकिन इसे भाषा विरोध से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने दोहराया कि वह किसी भाषा के खिलाफ नहीं हैं।
शिक्षकों को दी नई पहल की सलाह
शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के सवाल पर योगेंद्र उपाध्याय ने कॉलेज शिक्षकों से भी सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने सुझाव दिया कि डिग्री कॉलेजों के शिक्षक आसपास के इंटर कॉलेजों से संपर्क बढ़ाएं ताकि छात्रों की संख्या में सुधार हो सके।
उन्होंने कहा कि व्यावसायिक और कौशल आधारित पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देना समय की जरूरत है। इससे छात्रों को रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे और शिक्षा व्यवस्था भी अधिक व्यावहारिक बन सकेगी।
शिक्षा में मूल्यों पर बढ़ रही चर्चा
हाल के वर्षों में शिक्षा के स्वरूप, पाठ्यक्रम और नैतिक मूल्यों को लेकर देशभर में चर्चा बढ़ी है। नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद भी इस बात पर जोर दिया गया है कि शिक्षा केवल अकादमिक ज्ञान तक सीमित न रहे, बल्कि छात्रों के सर्वांगीण विकास पर भी ध्यान दिया जाए।
योगेंद्र उपाध्याय का बयान भी इसी बहस का हिस्सा माना जा रहा है, जहां शिक्षा में भाषा, संस्कृति और नैतिक मूल्यों के संतुलन को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं।
