AviationFuel – अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस के लिए एटीएफ कीमतों में फिर बढ़ोतरी
AviationFuel – अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस के लिए विमानन टरबाइन ईंधन यानी एटीएफ की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी की गई है। तेल कंपनियों ने शुक्रवार को नई दरें जारी करते हुए विदेशी एयरलाइंस के लिए जेट ईंधन महंगा कर दिया। लगातार दूसरे महीने हुई इस वृद्धि को वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती कीमतों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि घरेलू एयरलाइंस के लिए फिलहाल एटीएफ दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

नई दरों के अनुसार दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए एटीएफ की कीमत लगभग 5 प्रतिशत से अधिक बढ़ी है। तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ऊर्जा उत्पादों की लागत में आई तेजी को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
घरेलू यात्रियों को तत्काल राहत
घरेलू एयरलाइंस के लिए ईंधन कीमतों में स्थिरता बनाए रखने से फिलहाल विमान किराए पर सीधा असर पड़ने की संभावना कम मानी जा रही है। विमानन क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि अगर घरेलू एटीएफ की कीमतों में भी बढ़ोतरी होती, तो एयरलाइंस यात्रियों पर अतिरिक्त भार डाल सकती थीं।
विशेषज्ञों के अनुसार, विमानन कंपनियों के कुल परिचालन खर्च में ईंधन की हिस्सेदारी काफी अधिक होती है। ऐसे में एटीएफ की कीमतों में बदलाव सीधे एयरलाइन कंपनियों की लागत और टिकट दरों को प्रभावित करता है। फिलहाल घरेलू उड़ानों के यात्रियों के लिए स्थिति स्थिर बनी हुई है।
वैश्विक हालात का पड़ रहा असर
ऊर्जा बाजार में हाल के महीनों में उतार-चढ़ाव लगातार जारी है। पश्चिम एशिया में तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर अब विमानन ईंधन पर भी दिखाई दे रहा है। तेल कंपनियों ने वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस के लिए कीमतों में संशोधन किया है।
विश्लेषकों का मानना है कि विदेशी एयरलाइंस को बाजार आधारित दरों पर ईंधन उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि घरेलू क्षेत्र में सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की कोशिश कर रही हैं। इससे देश के भीतर हवाई यात्रा पर अचानक बोझ बढ़ने से बचाव हो सकता है।
दो दशक पहले बदला था मूल्य निर्धारण ढांचा
विमानन ईंधन की कीमतों को लेकर भारत में दो दशक पहले बड़ा बदलाव किया गया था, जब इनके मूल्य निर्धारण को विनियमित प्रणाली से अलग किया गया। इसके बाद से एटीएफ की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार और तेल कंपनियों की लागत के आधार पर तय की जाने लगीं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार के लिए अलग-अलग मूल्य रणनीति अपनाने से एयरलाइन उद्योग को कुछ हद तक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है। हालांकि अगर वैश्विक ऊर्जा संकट लंबे समय तक जारी रहता है, तो आने वाले महीनों में घरेलू बाजार पर भी इसका प्रभाव दिखाई दे सकता है।
एयरलाइन उद्योग की नजर आगे की स्थिति पर
विमानन कंपनियां फिलहाल वैश्विक तेल बाजार की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं, तो भविष्य में घरेलू एटीएफ दरों की समीक्षा भी हो सकती है। फिलहाल सरकार और तेल कंपनियां स्थिति को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रही हैं।