उत्तर प्रदेश

Expressway Toll – गंगा एक्सप्रेसवे पर तय हुई नई दरें, सफर होगा आसान

Expressway Toll – उत्तर प्रदेश की प्रमुख आधारभूत परियोजनाओं में शामिल गंगा एक्सप्रेसवे अब संचालन की दिशा में एक और अहम पड़ाव पार कर चुका है। इस एक्सप्रेसवे पर चलने वाले वाहनों के लिए टोल दरों का निर्धारण कर दिया गया है, जो वित्तीय वर्ष 2026-27 से लागू होंगी। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा जारी इन दरों को प्रति किलोमीटर के हिसाब से तय किया गया है। इसके लिए दिसंबर 2025 के थोक मूल्य सूचकांक को आधार बनाया गया है, जिससे लागत और रखरखाव के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है।

वाहनों के अनुसार अलग-अलग टोल दरें तय

नई व्यवस्था के तहत अलग-अलग श्रेणी के वाहनों के लिए अलग दरें निर्धारित की गई हैं। दोपहिया, तिपहिया और ट्रैक्टर चालकों को प्रति किलोमीटर 1.28 रुपये का भुगतान करना होगा। वहीं कार, जीप, वैन और अन्य हल्के वाहनों के लिए यह दर 2.55 रुपये प्रति किलोमीटर रखी गई है। हल्के वाणिज्यिक वाहनों, मिनी बस और छोटे मालवाहक वाहनों के लिए 4.05 रुपये प्रति किलोमीटर टोल निर्धारित किया गया है। इस वर्गीकरण का उद्देश्य वाहन की क्षमता और सड़क उपयोग के अनुपात में शुल्क तय करना है।

भारी वाहनों के लिए अधिक शुल्क

बस और ट्रक जैसे भारी वाहनों पर अपेक्षाकृत अधिक टोल लगाया गया है। इनके लिए 8.20 रुपये प्रति किलोमीटर की दर तय की गई है। इसके अलावा, मल्टी एक्सल वाहन, निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली भारी मशीनरी और अर्थ मूविंग उपकरणों के लिए 12.60 रुपये प्रति किलोमीटर शुल्क निर्धारित किया गया है। सात या उससे अधिक एक्सल वाले बड़े वाहनों के लिए सबसे अधिक 16.10 रुपये प्रति किलोमीटर की दर रखी गई है। यह संरचना सड़क पर पड़ने वाले भार और रखरखाव लागत को ध्यान में रखकर बनाई गई है।

रखरखाव और भविष्य की लागत को ध्यान में रखकर निर्णय

प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि टोल दरें तय करते समय एक्सप्रेसवे के संचालन, रखरखाव और भविष्य में होने वाले खर्च को ध्यान में रखा गया है। साथ ही, महंगाई दर में बदलाव के अनुसार आगे इन दरों की समीक्षा भी की जा सकती है। इस तरह की व्यवस्था से परियोजना की वित्तीय स्थिरता बनाए रखने का प्रयास किया गया है।

12 जिलों को जोड़ेगा हाई-स्पीड मार्ग

गंगा एक्सप्रेसवे प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण मार्ग है। यह मेरठ से लेकर प्रयागराज तक 12 जिलों को सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेगा, जिनमें हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और प्रतापगढ़ शामिल हैं। इसके चालू होने से इन क्षेत्रों के बीच यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। जहां पहले लंबी दूरी तय करने में काफी समय लगता था, वहीं अब यह सफर तेज और अधिक सुविधाजनक हो जाएगा।

उद्घाटन कार्यक्रम और अन्य गतिविधियां

इस एक्सप्रेसवे के उद्घाटन को लेकर भी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। प्रधानमंत्री निर्धारित कार्यक्रम के तहत हरदोई पहुंचेंगे, जहां वे इस परियोजना का लोकार्पण करेंगे। इसके साथ ही वे परियोजना से जुड़ी प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे, पौधरोपण करेंगे और एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे। यह कार्यक्रम इस परियोजना के महत्व को दर्शाता है और इसे प्रदेश के विकास की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

आर्थिक गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा

इस हाई-स्पीड कॉरिडोर के शुरू होने से केवल यात्रियों को ही नहीं, बल्कि व्यापार और उद्योग को भी लाभ मिलने की संभावना है। माल परिवहन तेज और किफायती होने से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी, जिससे व्यवसायों को सीधे तौर पर फायदा होगा। इससे प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।

आधुनिक तकनीक और विस्तार की सुविधा

गंगा एक्सप्रेसवे को सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत विकसित किया गया है। फिलहाल इसे छह लेन में तैयार किया गया है, लेकिन भविष्य में जरूरत पड़ने पर इसे आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकता है। 120 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड के साथ यह मार्ग तेज और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करेगा। बेहतर निर्माण गुणवत्ता और आधुनिक सुरक्षा सुविधाओं के कारण इसे देश के उन्नत एक्सप्रेसवे में गिना जा रहा है।

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