उत्तर प्रदेश

TransportScam – मानकों को दरकिनार कर बसों के पंजीकरण पर उठे सवाल

TransportScam – हरदोई जिले में बसों के पंजीकरण को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि परिवहन विभाग के कुछ अधिकारियों और दलालों की मिलीभगत से ऐसी बसों को भी सड़कों पर उतार दिया गया, जो निर्धारित सुरक्षा मानकों पर खरी नहीं उतरतीं। इस तरह की लापरवाही न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन सकती है।

दो मामलों ने खोली व्यवस्था की पोल
हरदोई के खजांची टोला निवासी रजिया हाशमी ने हाल ही में टाटा मोटर्स की एक नई बस खरीदी थी। बस की बॉडी तैयार करवाई गई, लेकिन वह तय मानकों के अनुरूप नहीं थी। जानकारी के अनुसार, बस का आकार निर्धारित सीमा से अधिक था और सीटिंग व्यवस्था के साथ-साथ इमरजेंसी गेट में भी खामियां थीं। इसके बावजूद कथित तौर पर दलालों की मदद से बस का पंजीकरण करा दिया गया और वह अब सड़कों पर संचालित हो रही है।

इसी तरह हरदेवगंज की रहने वाली बसुधा ने भी अशोक लीलैंड की नई बस खरीदी। उनकी बस की बॉडी, फ्लोर और सीटों में भी कई तकनीकी कमियां बताई जा रही हैं। बावजूद इसके, दलालों के जरिए बस का पंजीकरण कर लिया गया। सूत्रों का दावा है कि इन दोनों मामलों में नियमों की अनदेखी साफ तौर पर देखी जा सकती है।

सुरक्षा मानकों की अनदेखी से बढ़ा खतरा
जिले में इस तरह के कई और मामले सामने आने की बात कही जा रही है, जहां बिना पूरी जांच के बसों को रजिस्ट्रेशन दे दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की लापरवाही सड़क हादसों की वजह बन सकती है। हाल के वर्षों में हुए कुछ बड़े बस हादसों में भी फिटनेस और सुरक्षा मानकों पर सवाल उठे थे।

मोहनलालगंज में दिल्ली से बिहार जा रही एक बस में आग लगने से पांच यात्रियों की मौत हो गई थी, जबकि गोसाईंगंज में हुए एक अन्य हादसे में कई लोग घायल हुए थे। इन घटनाओं की जांच में सामने आया था कि कई बसें जरूरी सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं कर रही थीं, जिससे जोखिम और बढ़ गया।

दलालों के जरिए कथित वसूली का आरोप
सूत्रों के अनुसार, जिन बसों का पंजीकरण लंबित था, उन्हें मंजूरी दिलाने के लिए दलालों ने अहम भूमिका निभाई। बताया जा रहा है कि प्रति बस करीब 50 हजार रुपये तक की रकम वसूली गई, जो कथित तौर पर संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई गई। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन मामले ने कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

पंजीकरण के दौरान जरूरी जांच के मानक
बसों के पंजीकरण से पहले कई तकनीकी पहलुओं की जांच अनिवार्य होती है। इनमें उत्सर्जन स्तर, बस की लंबाई-चौड़ाई, टायर की स्थिति, इमरजेंसी एग्जिट, स्पीड गवर्नर, पैनिक बटन, सीटिंग क्षमता और अग्निशमन यंत्र जैसी सुविधाएं शामिल होती हैं। इसके अलावा लाइटिंग, वायरिंग और रिफ्लेक्टिव टेप जैसे सुरक्षा उपायों की भी जांच की जाती है। इन मानकों का पालन न होने पर बस को सड़कों पर चलाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

जांच के आदेश, कार्रवाई का भरोसा
लखनऊ संभाग के आरटीओ प्रशासन संजय तिवारी ने बताया कि नए वाहनों के पंजीकरण में निर्धारित मानकों की जांच की जाती है। उन्होंने कहा कि हरदोई में सामने आए मामलों की जांच कराई जाएगी। यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ने पर बसों का पंजीकरण भी रद्द किया जा सकता है।

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