GlacierMelt – धौली नदी में बढ़ा जलस्तर, तमक गांव के पास बढ़ी सतर्कता
GlacierMelt – उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में तापमान बढ़ने के साथ ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिसका असर अब नदियों के जलस्तर पर भी साफ दिखने लगा है। धौली नदी में पानी का स्तर बढ़ने से प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है। खासकर ज्योतिर्मठ से आगे तमक गांव के पास स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है, जहां नदी के प्रवाह में आंशिक रुकावट की जानकारी सामने आई है।

मलबा जमा होने से बनी झील जैसी स्थिति
तमक गांव के पास पिछले साल हुए भूस्खलन के कारण बड़ी मात्रा में मलबा नदी किनारे जमा हो गया था। अब ग्लेशियर पिघलने से बढ़े पानी के कारण यह मलबा नदी के बहाव को आंशिक रूप से रोक रहा है, जिससे वहां झील जैसी स्थिति बन गई है। हालांकि राहत की बात यह है कि पानी पूरी तरह रुका नहीं है और लगातार रिसाव जारी है, जिससे अचानक किसी बड़े खतरे की संभावना फिलहाल कम मानी जा रही है।
प्रशासन ने शुरू की निगरानी और तैयारी
जिलाधिकारी गौरव कुमार ने बताया कि स्थिति पर प्रशासन पूरी तरह नजर बनाए हुए है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी तक किसी गंभीर खतरे की आशंका नहीं है, लेकिन एहतियात के तौर पर सभी संबंधित विभागों को सक्रिय कर दिया गया है। प्रशासन, सिंचाई विभाग, खनन विभाग और अन्य एजेंसियां मौके पर लगातार निगरानी कर रही हैं ताकि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
मलबा हटाने की प्रक्रिया शुरू होगी
स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए मंगलवार से मलबा हटाने का काम शुरू करने की योजना बनाई गई है। इसके लिए जेसीबी मशीनों की मदद ली जाएगी ताकि नदी का बहाव सामान्य बना रहे और पानी कहीं जमा न हो। अधिकारियों का मानना है कि समय रहते यह कदम उठाने से किसी भी संभावित खतरे को टाला जा सकता है।
ग्लेशियर पिघलने से बढ़ा दबाव
विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मी बढ़ने के कारण ऊंचाई वाले इलाकों में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे नदियों में पानी की मात्रा बढ़ जाती है। ऐसे में जहां-जहां प्राकृतिक या कृत्रिम अवरोध होते हैं, वहां पानी के जमा होने की स्थिति बन सकती है। यही वजह है कि तमक गांव के पास स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर सतर्कता बढ़ाई गई
स्थानीय प्रशासन ने आसपास के क्षेत्रों में भी सतर्कता बढ़ा दी है। ग्रामीणों को सावधानी बरतने और नदी के किनारे अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही, किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सूचना देने के लिए भी कहा गया है।
फिलहाल खतरे की स्थिति नहीं, लेकिन निगरानी जारी
प्रशासन का कहना है कि वर्तमान स्थिति नियंत्रण में है और पानी का प्रवाह पूरी तरह से बंद नहीं हुआ है। फिर भी, लगातार निगरानी और मलबा हटाने की प्रक्रिया के जरिए जोखिम को कम करने की कोशिश की जा रही है। आने वाले दिनों में मौसम और ग्लेशियर पिघलने की रफ्तार के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।