उत्तर प्रदेश

CyberFraud – डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर रिटायर्ड अधिकारी से हुई 84 लाख की ठगी

CyberFraud – लखनऊ के जानकीपुरम इलाके में रहने वाले एक सेवानिवृत्त ट्रेजरी अधिकारी को साइबर ठगों ने बेहद सुनियोजित तरीके से अपने जाल में फंसाकर 84 लाख 50 हजार रुपये की ठगी कर ली। आरोपियों ने खुद को विभिन्न एजेंसियों का अधिकारी बताकर पीड़ित को करीब 27 दिनों तक मानसिक दबाव में रखा और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा माहौल बनाकर पैसे ट्रांसफर करवाते रहे।

फर्जी आरोप लगाकर शुरू हुआ खेल

पीड़ित बदरुद्दीन अंसारी के अनुसार, सात मार्च को उनके पास एक अनजान नंबर से व्हाट्सएप कॉल आई। कॉल करने वाले ने अपना नाम प्रमोद कुमार मिश्र बताया और खुद को लखनऊ पुलिस मुख्यालय से जुड़ा अधिकारी बताया। बातचीत के दौरान उसने कहा कि अंसारी का नाम महाराष्ट्र में चल रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सामने आया है। यह सुनकर पीड़ित घबरा गए और यहीं से ठगों ने उन्हें अपने जाल में कसना शुरू कर दिया।

जाली दस्तावेजों से भरोसा जीतने की कोशिश

ठगों ने अपनी बात को विश्वसनीय बनाने के लिए व्हाट्सएप पर एनआईए, आरबीआई और सुप्रीम कोर्ट के नाम से तैयार किए गए फर्जी दस्तावेज भेजे। इन दस्तावेजों को देखकर पीड़ित को लगा कि मामला गंभीर है। इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने खुद को एटीएस अधिकारी बताते हुए उनसे संपर्क किया और सख्त लहजे में कहा कि वे किसी से भी इस मामले की चर्चा न करें, वरना कार्रवाई और कठोर हो सकती है।

डर और दबाव में कराए गए ट्रांजेक्शन

लगातार मिल रही धमकियों और ‘जांच’ के नाम पर बनाए गए माहौल ने पीड़ित को पूरी तरह डरा दिया। ठगों ने उनसे उनके सभी बैंक खातों की जानकारी ले ली और अलग-अलग किस्तों में कुल 84 लाख 50 हजार रुपये ट्रांसफर करवा लिए। इस दौरान उन्हें भरोसा दिलाया गया कि जांच पूरी होने के बाद पूरी रकम वापस कर दी जाएगी, जिससे पीड़ित ने बिना शक किए पैसे भेज दिए।

सच सामने आने पर दर्ज कराई शिकायत

जब लंबे समय तक रकम वापस नहीं मिली, तब पीड़ित को शक हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है। इसके बाद उन्होंने साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई और स्थानीय थाने में भी मामला दर्ज कराया। उन्होंने बताया कि डर के कारण उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम के दौरान किसी से भी चर्चा नहीं की थी।

पुलिस ने शुरू की जांच, कुछ रकम फ्रीज

साइबर क्राइम थाने के इंस्पेक्टर ब्रजेश कुमार ने बताया कि पीड़ित की शिकायत पर केस दर्ज कर लिया गया है और आरोपियों के बैंक खातों की जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि 11 मार्च से 4 अप्रैल के बीच पैसे ट्रांसफर किए गए थे। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए करीब 27 लाख रुपये संबंधित खातों में फ्रीज करवा दिए हैं और बाकी रकम का पता लगाने की कोशिश जारी है।

साइबर ठगी के बढ़ते मामलों पर चिंता

इस घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि साइबर अपराधी कितनी चालाकी से लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। खासतौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे नए तरीकों का इस्तेमाल कर लोगों में डर पैदा किया जा रहा है, जिससे वे बिना सत्यापन किए बड़े वित्तीय फैसले ले लेते हैं।

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