उत्तराखण्ड

HemkundYatra – कपाट खुलने से पहले सेना ने शुरू किया बर्फ हटाने का अभियान

HemkundYatra – उत्तराखंड के प्रसिद्ध हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग को सुचारु बनाने की तैयारियां तेज हो गई हैं। यात्रा शुरू होने से पहले रास्ते पर जमी भारी बर्फ को हटाने के लिए भारतीय सेना और गुरुद्वारा प्रबंधन से जुड़े सेवादारों की संयुक्त टीम बुधवार को गोविंदघाट से आगे के लिए रवाना हुई। इस समय यात्रा मार्ग के कई हिस्से मोटी बर्फ की चादर से ढके हुए हैं, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित है।

आठ फीट तक जमी बर्फ बनी चुनौती

हेमकुंड साहिब जाने वाले मार्ग पर इस बार बर्फबारी अधिक हुई है। खासकर अटलाकोटी से आगे के इलाके में स्थिति ज्यादा कठिन है, जहां कई जगहों पर आठ फीट से अधिक बर्फ जमा है। ऐसे में यात्रा मार्ग को समय पर तैयार करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। सेना की 418 माउंटेन ब्रिगेड और सेवादारों की टीम इसी चुनौती से निपटने के लिए पूरी योजना के साथ आगे बढ़ी है।

अरदास के बाद टीम ने संभाला जिम्मा

रवाना होने से पहले सेना के जवानों और सेवादारों ने गुरुद्वारे में अरदास कर सुरक्षित और सफल कार्य की कामना की। इसके बाद हेमकुंड साहिब प्रबंधन ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सरदार सेवा सिंह ने दल को घांघरिया की ओर प्रस्थान कराया। यह टीम अब चरणबद्ध तरीके से बर्फ हटाने का कार्य करेगी, ताकि रास्ता श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित बनाया जा सके।

पहले ही किया जा चुका है मार्ग का निरीक्षण

प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, सेवादारों की एक टीम लगभग एक सप्ताह पहले इलाके का जायजा लेकर लौटी थी। उस दौरान यह पाया गया कि ग्लेशियर क्षेत्र में बर्फ की मोटी परत जमी हुई है, जिससे यात्रा मार्ग पूरी तरह ढका हुआ है। इसी रिपोर्ट के आधार पर अब बर्फ हटाने का काम शुरू किया गया है, ताकि तय समयसीमा में मार्ग को खोला जा सके।

तीन सप्ताह में मार्ग साफ करने का लक्ष्य

प्रबंधन ट्रस्ट ने बताया है कि घांघरिया में डेरा डालकर टीम हर दिन बर्फ हटाने का काम करेगी। अनुमान है कि करीब तीन सप्ताह के भीतर पूरे मार्ग को साफ कर लिया जाएगा। इससे यात्रा शुरू होने से पहले अन्य जरूरी तैयारियों के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा। इस साल हेमकुंड साहिब के कपाट 23 मई को श्रद्धालुओं के लिए खोले जाने हैं।

यात्रा की शुरुआत की तैयारियां भी जारी

यात्रा की औपचारिक शुरुआत 20 मई को ऋषिकेश से पहले जत्थे के प्रस्थान के साथ होगी। इसके लिए प्रशासन और प्रबंधन स्तर पर अन्य व्यवस्थाओं को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है। सुरक्षा, स्वास्थ्य और आवास से जुड़ी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

सेना और सेवादारों के प्रयासों की सराहना

हेमकुंड साहिब प्रबंधन ट्रस्ट के अध्यक्ष सरदार नरेंद्र जीत सिंह बिंद्रा ने हर साल की तरह इस बार भी सेना और सेवादारों की भूमिका की सराहना की है। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी ये सभी लोग निस्वार्थ भाव से काम करते हैं, जिससे यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सके। उन्होंने इस सहयोग के लिए सभी का आभार भी व्यक्त किया।

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