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ShashiTharoor – ईरान मुद्दे पर शोक संदेश को लेकर थरूर की प्रतिक्रिया

ShashiTharoor – कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर भारत की प्रतिक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि भारत को समय रहते आधिकारिक शोक संदेश जारी करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में ऐसे मौके संवेदनशील होते हैं और इन्हें संतुलित तरीके से संभालना जरूरी होता है। थरूर के अनुसार, यह केवल राजनीतिक प्रतिक्रिया का विषय नहीं, बल्कि कूटनीतिक शिष्टाचार का भी हिस्सा है।

समय पर संवेदना जताने पर दिया जोर

एक समाचार एजेंसी से बातचीत में थरूर ने कहा कि कई लोग पहले ही इस मुद्दे पर सवाल उठा चुके हैं और वह उनकी बात से सहमत हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस दिन खामेनेई के निधन की खबर सामने आई, उसी दिन भारत को अपनी संवेदना प्रकट करनी चाहिए थी। उनके मुताबिक, ईरान में खामेनेई की भूमिका और प्रभाव को देखते हुए यह कदम पूरी तरह उचित होता।

पुरानी घटना का किया उल्लेख

थरूर ने अपने बयान के दौरान वर्ष 2024 की एक घटना को भी याद किया। उन्होंने बताया कि जब ईरान के तत्कालीन राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हुई थी, तब भारत ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए राजकीय शोक की घोषणा की थी। उन्होंने इसे उदाहरण के तौर पर पेश करते हुए कहा कि उस समय की गई कार्रवाई कूटनीतिक दृष्टि से सही थी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि हालिया मामले में जब दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास में शोक पुस्तिका खोली गई, तब भारत की ओर से विदेश सचिव को भेजा जाना एक सकारात्मक कदम रहा।

शोक और निंदा को अलग बताया

कांग्रेस नेता ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि शोक व्यक्त करना और किसी घटना की निंदा करना दो अलग-अलग बातें हैं। उन्होंने कहा कि अगर भारत ने अमेरिका या इस्राइल की कार्रवाई पर कोई टिप्पणी नहीं की, तो यह एक अलग राजनीतिक निर्णय हो सकता है। लेकिन शोक व्यक्त करना मानवीय दृष्टिकोण से जुड़ा होता है, जो किसी देश या उसके नागरिकों के प्रति सहानुभूति दर्शाने का माध्यम बनता है।

लेख और पार्टी रुख पर सफाई

जब उनसे उनके हालिया लेख को लेकर सवाल किया गया, जिसमें कुछ विचार पार्टी के आधिकारिक रुख से अलग बताए गए, तो थरूर ने कहा कि विपक्ष के तौर पर पार्टी नेताओं द्वारा व्यक्त किए गए विचारों का वह सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि उनका लेख मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित था कि सरकार को ऐसे हालात में किस तरह का रुख अपनाना चाहिए।

संयम को बताया कूटनीतिक ताकत

थरूर ने आगे कहा कि अंतरराष्ट्रीय तनाव के समय संयम बरतना कमजोरी नहीं, बल्कि परिपक्वता का संकेत होता है। उन्होंने कहा कि यदि वह किसी भी सरकार को सलाह देते, तो यही कहते कि ऐसे मामलों में सोच-समझकर कदम उठाना चाहिए। उनके अनुसार, सबसे महत्वपूर्ण बात देश के हितों की रक्षा करना है और हर निर्णय इसी आधार पर लिया जाना चाहिए।

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