उत्तराखण्ड

Vishnugad Project Accident: विष्णुगाड हाइड्रो प्रोजेक्ट हादसे की मजिस्ट्रेटी जांच शुरू, आखिर किसकी लापरवाही से दांव पर लगी 70 जानें…

Vishnugad Project Accident: उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित पीपलकोटी-विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना की सुरंग उस समय चीख-पुकार से गूंज उठी, जब दो लोको वैगन आपस में टकरा गए। 30 दिसंबर की रात करीब साढ़े आठ बजे हुए इस हादसे ने (Tunnel Safety) के तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी है। टीएचडीसी के इस प्रोजेक्ट में हुए भीषण हादसे की गंभीरता को देखते हुए अब प्रशासन ने मजिस्ट्रेटी जांच की प्रक्रिया तेज कर दी है। उप जिला मजिस्ट्रेट चमोली को इस पूरे मामले की तह तक जाने और दोषियों की पहचान करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

Vishnugad Project Accident
Vishnugad Project Accident

लापरवाही की वजह से हुआ बड़ा हादसा

हादसे के पीछे जो शुरुआती तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले और मानवीय भूल की ओर इशारा करते हैं। सुरंग के भीतर एक वैगन निर्माण सामग्री से लदा हुआ खड़ा था, जिसका ऑपरेटर उसे (Technical Negligence) के साथ असुरक्षित छोड़कर कहीं चला गया था। वह वैगन अचानक ढलान पर अपने आप नीचे की ओर सरकने लगा और सीधे उस दूसरे वैगन से जा टकराया जो श्रमिकों को लेकर सुरंग के अंदर प्रवेश कर रहा था। इस आमने-सामने की भिड़ंत ने सुरंग के भीतर अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया।

70 श्रमिकों की जान पर बनी आफत

इस दर्दनाक टक्कर में करीब 70 श्रमिक चोटिल हुए, जिससे प्रोजेक्ट साइट पर हड़कंप मच गया। प्राथमिक उपचार के बाद पता चला कि 8 श्रमिकों को (Critical Injuries) आई थीं, जिन्हें तत्काल एम्बुलेंस के माध्यम से जिला अस्पताल गोपेश्वर ले जाया गया। गनीमत रही कि हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन घायलों की संख्या को देखते हुए प्रशासन ने इसे सुरक्षा मानकों का बड़ा उल्लंघन माना है। वर्तमान में जिला अस्पताल में भर्ती श्रमिकों की स्थिति पर डॉक्टर निरंतर निगरानी रख रहे हैं।

जिला मजिस्ट्रेट के सख्त तेवर और जांच के आदेश

घटना की अगली सुबह ही चमोली के जिला मजिस्ट्रेट गौरव कुमार ने मामले का संज्ञान लेते हुए मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश पारित कर दिए थे। इस जांच की कमान (Sub-Divisional Magistrate) आरके पांडेय को सौंपी गई है। उनका मुख्य कार्य यह पता लगाना है कि आखिर वैगन को लावारिस स्थिति में ढलान पर क्यों छोड़ा गया और सुरक्षा के निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन क्यों नहीं किया गया। प्रशासन इस मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं दिख रहा है।

प्रत्यक्षदर्शियों और चश्मदीदों से अपील

जांच अधिकारी आरके पांडेय ने पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए घटना के समय वहां मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों को आगे आने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा है कि जो कोई भी इस (Project Accident Case) के बारे में कोई पुख्ता जानकारी रखता है, वह लिखित या मौखिक रूप से अपना बयान दर्ज करा सकता है। चश्मदीदों के बयान इस बात की पुष्टि करेंगे कि क्या यह वाकई एक तकनीकी खराबी थी या फिर सुरक्षा प्रबंधन की घोर लापरवाही, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।

जल विद्युत परियोजनाओं की सुरक्षा पर सवाल

यह हादसा एक बार फिर उत्तराखंड की बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं में श्रमिकों की सुरक्षा और कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाता है। निर्माण कार्य (Hydropower Project Construction) के दौरान अक्सर सुरक्षा मानकों की अनदेखी की शिकायतें आती रहती हैं। स्थानीय लोगों और श्रमिक संगठनों ने मांग की है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी अधिकारियों और संबंधित कंपनी पर सख्त कार्रवाई की जाए। फिलहाल, पीपलकोटी में माहौल तनावपूर्ण है और लोग जांच के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं।

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