Uttarakhand Tunnel Accident News: मौत के मुहाने से लौटे मजदूर, विष्णुगाड टनल के भीतर दो ट्रेनों की भीषण टक्कर ने फिर दहलाया उत्तराखंड
Uttarakhand Tunnel Accident News: उत्तराखंड की शांत वादियों में एक बार फिर चीख-पुकार मच गई जब चमोली जिले की विष्णुगाड जलविद्युत परियोजना की टनल के भीतर एक भयानक हादसा हुआ। मंगलवार की देर रात जब दुनिया सो रही थी, तब जमीन के सैकड़ों फीट नीचे (Infrastructure Safety) के दावों के बीच दो लोको ट्रेनें आपस में टकरा गईं। यह टक्कर इतनी जोरदार थी कि पूरी टनल गूंज उठी और वहां काम कर रहे दर्जनों मजदूरों के लिए यह किसी बुरे सपने जैसा साबित हुआ।

टनल के अंधेरे में जिंदगी और मौत की जंग
जानकारी के मुताबिक, यह हादसा उस समय हुआ जब मजदूरों को टनल के अंदर और बाहर ले जाने वाली दो लोको ट्रेनें विपरीत दिशा से आते हुए आपस में भिड़ गईं। टनल के भीतर (Emergency Response) की व्यवस्था को इस टक्कर ने पूरी तरह हिलाकर रख दिया। टक्कर के बाद वहां अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया और घायलों की कराह से टनल का वातावरण बोझिल हो गया। रेस्क्यू टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया।
जिला प्रशासन ने संभाला मोर्चा और घायलों का हाल जाना
हादसे की सूचना मिलते ही चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार और पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने बिना समय गंवाए जिला अस्पताल गोपेश्वर का रुख किया। वहां भर्ती (Medical Treatment) करा रहे मजदूरों की स्थिति का उन्होंने जायजा लिया। जिलाधिकारी ने खुद वार्डों का दौरा किया और डॉक्टरों को सख्त निर्देश दिए कि इलाज में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए। प्रशासन ने इस घटना की उच्च स्तरीय जांच के संकेत भी दिए हैं।
साठ के करीब मजदूर घायल और अस्पतालों में भर्ती
प्रारंभिक सूचना के अनुसार, इस भीषण हादसे में लगभग 60 मजदूरों के घायल होने की खबर है। इनमें से 42 घायल मजदूरों का उपचार (District Hospital Gopeshwar) में किया जा रहा है, जबकि 17 अन्य श्रमिकों को पीपलकोटी के विवेकानंद अस्पताल में भर्ती कराया गया है। गनीमत यह रही कि फिलहाल सभी घायलों की स्थिति स्थिर बताई जा रही है, लेकिन हादसे के मानसिक सदमे से मजदूर अभी भी बाहर नहीं निकल पाए हैं।
विष्णुगाड परियोजना: हादसों का एक खौफनाक इतिहास
विष्णुगाड परियोजना का नाम सुनते ही मजदूरों के मन में डर बैठ जाता है क्योंकि यहां पहले भी बड़े विनाशकारी हादसे हो चुके हैं। 7 फरवरी 2021 को (Glacier Burst) के कारण ऋषिगंगा नदी में आई भीषण बाढ़ ने इस प्रोजेक्ट साइट पर तबाही मचाई थी। उस समय टनल में मलबा और पानी भर जाने से 100 से अधिक मजदूरों ने अपनी जान गंवा दी थी। वह घाव अभी भरा भी नहीं था कि इस ट्रेन टक्कर ने पुराने जख्मों को कुरेद दिया है।
सिलक्यारा टनल का वह रोंगटे खड़े करने वाला मंजर
उत्तराखंड में सुरंग हादसों की बात करें तो नवंबर 2023 का सिलक्यारा हादसा भुलाया नहीं जा सकता। वहां 41 मजदूर (Underground Entrapment) के शिकार हुए थे और पूरे 17 दिनों तक देश-दुनिया की सांसें थमी रही थीं। ‘ऑपरेशन सिलक्यारा’ के जरिए उन्हें सुरक्षित निकाला तो गया, लेकिन उस टनल में पिछले पांच सालों में 20 से अधिक छोटे-बड़े हादसे होना पहाड़ों में निर्माण कार्य की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े करते हैं।
पिथौरागढ़ में भी मजदूरों ने झेला था मौत का डर
हाल ही में अगस्त 2025 में पिथौरागढ़ में भी एक बड़ा हादसा पेश आया था जब भूस्खलन की वजह से एनएचपीसी पावर हाउस की सुरंग का मुहाना बंद हो गया था। उस समय (Tunnel Obstruction) की वजह से 19 मजदूर टनल के भीतर ही फंस गए थे। पहाड़ों की कमजोर भूगर्भीय संरचना और भारी मशीनों का उपयोग अक्सर ऐसे हादसों को निमंत्रण देता है, जिससे मजदूरों की जान हमेशा जोखिम में बनी रहती है।
लोको ट्रेनों की टक्कर ने बढ़ाई सुरक्षा पर चिंता
टनल के भीतर मजदूरों के परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाली लोको ट्रेनों का टकराना एक बड़ी तकनीकी लापरवाही की ओर इशारा करता है। (Safety Protocols) का पालन न होना या सिग्नलिंग सिस्टम में खराबी इस हादसे की मुख्य वजह हो सकती है। 13 किलोमीटर लंबी इस टनल में एक साथ दो ट्रेनों का एक ही ट्रैक पर या गलत दिशा से आना यह दर्शाता है कि वहां मॉनिटरिंग सिस्टम में कहीं न कहीं बड़ी चूक हुई है।
हिमालयी क्षेत्रों में विकास और विनाश के बीच की लकीर
उत्तराखंड में लगातार हो रहे ये टनल हादसे अब नीति नियंताओं के लिए चेतावनी बन चुके हैं। (Sustainable Development) के दावों के बीच हिमालय के कच्चे पहाड़ों को काटकर बनाई जा रही ये सुरंगें मजदूरों के लिए काल साबित हो रही हैं। चमोली की यह घटना केवल एक रेल टक्कर नहीं है, बल्कि यह उन हजारों मजदूरों के जीवन की असुरक्षा का प्रतीक है जो देश के विकास के लिए अपनी जान हथेली पर रखकर काम करते हैं।
मजदूरों के परिवारों में चिंता और भविष्य का अनिश्चित भय
जैसे ही इस ट्रेन हादसे की खबर बाहर आई, दूर-दराज के राज्यों से आए मजदूरों के परिवारों में कोहराम मच गया। (Workers Welfare) की बातें तो अक्सर की जाती हैं, लेकिन जब ऐसे हादसे होते हैं, तो मुआवजा और इलाज ही एकमात्र समाधान बनकर रह जाता है। अब मांग उठ रही है कि विष्णुगाड परियोजना की टनल में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं ताकि भविष्य में फिर किसी मजदूर को मौत के साये में काम न करना पड़े।



