उत्तराखण्ड

Health – उत्तराखंड में डॉक्टरों के तबादलों पर हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

Health – उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य में विशेषज्ञ चिकित्सकों के बड़े पैमाने पर किए गए तबादलों से स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने वाले संभावित असर को गंभीरता से लिया है। इस मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई के लिए न्यायालय ने निर्धारित तिथि तय करते हुए सरकार को स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।

जनहित याचिका में स्वास्थ्य सेवाओं पर चिंता

वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। याचिका में प्रदेश के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के तबादलों के कारण स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने भी अदालत में हस्तक्षेप आवेदन दाखिल कर कहा कि यदि विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी बनी रही तो मरीजों को आवश्यक उपचार मिलने में कठिनाई हो सकती है।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी का मुद्दा उठा

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि नैनीताल स्थित बीडी पांडे जिला चिकित्सालय से छह विशेषज्ञ चिकित्सकों का तबादला कर दिया गया है। उनकी जगह पांच सामान्य चिकित्सकों और एक विशेषज्ञ डॉक्टर की तैनाती की गई है। इसी तरह हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज से 16 विशेषज्ञ चिकित्सकों के स्थानांतरण का भी उल्लेख किया गया, जिससे कई विभागों में विशेषज्ञों की उपलब्धता प्रभावित होने की बात सामने आई।

मेडिकल कॉलेजों में रिक्त पद भी बने चिंता का विषय

याचिका में यह भी बताया गया कि हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में अब केवल दो विशेषज्ञ चिकित्सक कार्यरत हैं, जबकि निर्धारित मानकों के अनुसार यहां कहीं अधिक विशेषज्ञों की आवश्यकता है। इसके अलावा कॉलेज में फैकल्टी के 112 पद रिक्त बताए गए हैं। कई अन्य सरकारी अस्पतालों में भी विशेषज्ञ चिकित्सकों के स्थानांतरण के बाद उनके स्थान पर समान स्तर के विशेषज्ञों की नियुक्ति नहीं होने का मुद्दा अदालत के सामने रखा गया।

सरकार से मांगा गया विस्तृत पक्ष

अदालत ने इन तथ्यों को रिकॉर्ड पर लेते हुए राज्य सरकार से स्पष्ट करने को कहा है कि तबादलों के बाद अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता कैसे सुनिश्चित की जा रही है। साथ ही यह भी पूछा गया है कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं। अब अगली सुनवाई में सरकार का पक्ष सामने आने के बाद अदालत आगे की कार्रवाई पर विचार करेगी।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर बनी हुई है नजर

यह मामला प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा होने के कारण लगातार चर्चा में है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, मेडिकल कॉलेजों में रिक्त पद और अस्पतालों में उपचार व्यवस्था को लेकर उठे सवालों पर अब न्यायालय की निगरानी बनी हुई है। आने वाली सुनवाई में सरकार के जवाब के आधार पर मामले की दिशा तय होने की संभावना है।

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