उत्तराखण्ड

CMHelpline – शिकायतें बंद करने पर सीएम सख्त, अधिकारियों को दी चेतावनी

CMHelpline – उत्तराखंड में सीएम हेल्पलाइन 1905 की समीक्षा के दौरान सामने आए आंकड़ों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जब यह जाना कि हजारों शिकायतों को बिना समाधान के बंद कर दिया गया है, तो उन्होंने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि बिना उचित प्रक्रिया के किसी भी शिकायत को बंद करना स्वीकार्य नहीं होगा।

जबरन बंद की गई हजारों शिकायतें

समीक्षा बैठक में यह सामने आया कि कुल 1,19,077 शिकायतों में से 22,246 मामलों को बिना संतोषजनक समाधान के बंद कर दिया गया। यह कुल शिकायतों का लगभग 18.68 प्रतिशत है। मुख्यमंत्री ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह की लापरवाही जनता के विश्वास को कमजोर करती है और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

उच्च स्तर की अनुमति के बिना कार्रवाई पर रोक

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि किसी भी शिकायत को बंद करने से पहले जिलाधिकारी, विभागाध्यक्ष या संबंधित सचिव की अनुमति जरूरी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि शिकायत का निस्तारण तभी माना जाएगा जब शिकायतकर्ता पूरी तरह संतुष्ट हो। हेल्पलाइन को उन्होंने आम जनता और सरकार के बीच भरोसे का अहम माध्यम बताया।

जिलावार शिकायतों की स्थिति

विभिन्न जिलों में शिकायतों की प्रकृति भी अलग-अलग सामने आई। देहरादून में शहरी विकास से जुड़ी 6,084 और पेयजल से संबंधित 2,980 शिकायतें दर्ज हुईं। ऊधम सिंह नगर में राजस्व और खनन से जुड़े मामलों की संख्या अधिक रही, जबकि हरिद्वार में खाद्य आपूर्ति और पुलिस से संबंधित शिकायतें प्रमुख रहीं। इन आंकड़ों ने विभागीय जिम्मेदारियों की स्थिति को भी उजागर किया।

कुछ विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई विभाग गंभीर शिकायतों को दूसरी श्रेणियों में डालकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, पानी की आपूर्ति न होने जैसी समस्याओं को भी बिना समाधान के बंद कर दिया गया। इसी तरह बिजली बिल और खराब मीटर से जुड़ी शिकायतों को तकनीकी कारणों में उलझाकर लंबित रखा गया।

जल संस्थान का मामला सबसे ज्यादा चर्चा में

पेयजल विभाग की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक पाई गई। जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक के पास आई 2,074 शिकायतों में से 2,043 को बिना ठोस समाधान के बंद कर दिया गया। यह आंकड़ा लगभग 98.5 प्रतिशत बैठता है। इस तरह की कार्यप्रणाली पर मुख्यमंत्री ने सख्त नाराजगी जताई।

लंबित मामलों में लगातार बढ़ोतरी

साल 2021 से अब तक 6,287 शिकायतें ऐसी हैं जो 180 दिनों से अधिक समय से लंबित हैं। इनमें राजस्व, वन और लोक निर्माण विभाग सबसे ऊपर हैं। इसके अलावा हाल के महीनों में लंबित मामलों में तेजी से वृद्धि देखी गई है। जनवरी से मार्च 2026 के बीच लंबित शिकायतों में 107 प्रतिशत और प्रक्रिया में चल रही शिकायतों में 2290 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

बेहतर काम करने वालों की सराहना भी

समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने उन अधिकारियों की सराहना भी की जिन्होंने शिकायतों के समाधान में बेहतर प्रदर्शन किया। कई अधिकारियों ने 97 प्रतिशत से अधिक मामलों का निस्तारण किया है। मुख्यमंत्री ने उनसे फोन पर बात कर उनके काम की प्रशंसा की और अन्य अधिकारियों को भी उनसे सीख लेने की सलाह दी।

नियमित समीक्षा और जवाबदेही पर जोर

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिलाधिकारी स्तर पर हर सप्ताह और सचिव स्तर पर हर महीने कम से कम दो बार समीक्षा बैठक की जाए। उनका कहना था कि हेल्पलाइन की सफलता तभी मानी जाएगी जब आम नागरिक यह महसूस करें कि उनकी समस्याओं का समयबद्ध और प्रभावी समाधान हो रहा है।

Back to top button

Adblock Detected

Please disable your AdBlocker first, and then you can watch everything easily.