Census – उत्तराखंड में डिजिटल जनगणना के पहले चरण ने पकड़ी रफ्तार
Census – उत्तराखंड में जनगणना के पहले चरण का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। पहाड़ी और दुर्गम इलाकों वाले राज्य में इस बार डिजिटल तकनीक की मदद से जनगणना प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने का प्रयास किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, राज्य के सभी जिलों में 25 अप्रैल से काम शुरू हो चुका है और शुरुआती चरण में प्रगणकों ने अपने-अपने क्षेत्रों का सर्वे कर नक्शा तैयार किया।

जनगणना निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद सभी क्षेत्रों में काम जारी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी इलाके में आपदा जैसी स्थिति बनती है तो जिला प्रशासन और एसडीआरएफ की सहायता ली जाएगी ताकि प्रक्रिया प्रभावित न हो।
दुर्गम क्षेत्रों में भी शुरू हुआ सर्वे
राज्य के पर्वतीय और सीमावर्ती क्षेत्रों में जनगणना को लेकर विशेष तैयारी की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती तीन दिनों में प्रगणकों ने अपने आवंटित क्षेत्रों का भ्रमण कर नजरी नक्शा तैयार किया। इसके बाद मकानों की सूची बनाने और आंकड़े एकत्र करने का काम शुरू किया गया।
जनगणना विभाग का कहना है कि राज्य के सभी जिलों और चार्ज क्षेत्रों में कार्य एक साथ शुरू किया गया है। इससे आगे की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने में मदद मिलेगी।
खाली मकानों का भी होगा पंजीकरण
उत्तराखंड में पलायन एक बड़ी सामाजिक चुनौती माना जाता है, जिसके कारण कई गांवों में बड़ी संख्या में घर खाली पड़े हैं। इस संबंध में अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जनगणना के पहले चरण में सभी प्रकार के मकानों का पंजीकरण किया जा रहा है।
चाहे मकान में कोई रह रहा हो, वह बंद पड़ा हो या व्यावसायिक उपयोग में हो, हर संरचना को सूची में शामिल किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इसका उद्देश्य राज्य में मौजूद सभी भवनों का सटीक रिकॉर्ड तैयार करना है।
मोबाइल एप और पोर्टल से हो रही निगरानी
इस बार की जनगणना में डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि एचएलबीसी पोर्टल के जरिए पूरे राज्य को 29,622 ब्लॉक्स में विभाजित किया गया है। प्रगणकों को डिजिटल नक्शे उपलब्ध कराए गए हैं और आंकड़े एकत्र करने के लिए विशेष मोबाइल एप तैयार किया गया है।
इसके अलावा सीएमएमएस पोर्टल के माध्यम से प्रगणकों और सुपरवाइजरों की कार्य प्रगति की रियल टाइम निगरानी की जा रही है। नियुक्ति पत्र, परिचय पत्र और कार्य आवंटन जैसी प्रक्रियाएं भी इसी प्रणाली के जरिए संचालित हो रही हैं।
फील्ड स्टाफ को दिया गया विशेष प्रशिक्षण
जनगणना विभाग के अनुसार, तकनीकी प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए कर्मचारियों को तीन स्तर पर प्रशिक्षण दिया गया है। इसमें मोबाइल एप के उपयोग, डेटा एंट्री और फील्ड सर्वे की मॉक ड्रिल भी शामिल रही।
अधिकारियों का कहना है कि कर्मचारियों को वास्तविक परिस्थितियों में अभ्यास कराया गया ताकि दूरदराज के इलाकों में काम के दौरान किसी प्रकार की दिक्कत न आए।
हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया
यदि कोई परिवार निर्धारित अवधि में घर पर मौजूद नहीं मिलता है, तो उसे “लॉक्ड” श्रेणी में दर्ज किया जाएगा। हालांकि यदि 30 दिनों की अवधि में परिवार का कोई सदस्य एक बार भी उपलब्ध हो जाता है तो जानकारी दर्ज की जा सकती है।
जनगणना विभाग ने आम लोगों की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबर 1855 भी जारी किया है। इस नंबर पर सोमवार से शुक्रवार सुबह नौ बजे से शाम छह बजे तक संपर्क कर जानकारी प्राप्त की जा सकती है।