UPPolitics – ब्राह्मण समीकरण साधने में जुटी भाजपा की नई रणनीति
UPPolitics – उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण समुदाय का प्रभाव लंबे समय से अहम माना जाता रहा है। राज्य की करीब सौ विधानसभा सीटों पर निर्णायक भूमिका रखने वाले इस वर्ग को अपने साथ बनाए रखने के लिए भाजपा लगातार राजनीतिक संतुलन साधने में जुटी हुई है। हाल के मंत्रिमंडल विस्तार और नेताओं की नियुक्तियों को भी इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि योगी आदित्यनाथ सरकार में ब्राह्मण चेहरों के रूप में शामिल कई नेता पहले दूसरे राजनीतिक दलों में रह चुके हैं और बाद में भाजपा में शामिल हुए।

मंत्रिमंडल में दूसरे दलों से आए नेताओं की मजबूत मौजूदगी
योगी सरकार के मौजूदा मंत्रिमंडल पर नजर डालें तो ब्राह्मण समुदाय से आने वाले कई मंत्री पहले अन्य दलों का हिस्सा रहे हैं। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक पहले बसपा में थे, जबकि प्रतिभा शुक्ला का भी बसपा से राजनीतिक जुड़ाव रहा है। हाल ही में मंत्रिमंडल में शामिल किए गए मनोज पांडे समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा में आए हैं। इसके अलावा रजनी तिवारी और दयाशंकर मिश्र दयालु भी अलग-अलग दलों से भाजपा में शामिल हुए थे। भाजपा नेतृत्व इन नेताओं के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों में ब्राह्मण मतदाताओं तक अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
जितिन प्रसाद के बाद मनोज पांडे को मिली जिम्मेदारी
वर्ष 2022 में भाजपा सरकार दोबारा बनने के बाद कांग्रेस छोड़कर आए जितिन प्रसाद को लोक निर्माण विभाग जैसा महत्वपूर्ण मंत्रालय सौंपा गया था। बाद में केंद्र सरकार में मंत्री बनने के कारण उन्होंने राज्य मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया। उनके केंद्र में जाने के बाद हालिया विस्तार में समाजवादी पार्टी से भाजपा में आए मनोज पांडे को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा इस तरह अलग-अलग राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले प्रभावशाली नेताओं को साथ जोड़कर सामाजिक संतुलन बनाए रखना चाहती है।
मूल संगठन से जुड़े नेताओं की संख्या सीमित
योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में पार्टी के पुराने और संगठन से जुड़े ब्राह्मण नेताओं की संख्या अपेक्षाकृत कम दिखाई देती है। वर्तमान मंत्रिमंडल में सतीश चंद्र शर्मा, सुनील शर्मा और योगेंद्र उपाध्याय जैसे कुछ नाम ही ऐसे हैं जो लंबे समय से भाजपा संगठन से जुड़े रहे हैं। पिछली सरकार में ऊर्जा मंत्री रहे श्रीकांत शर्मा को इस बार मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। वहीं पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा को राज्यसभा भेजा गया। इन फैसलों को भी पार्टी की व्यापक राजनीतिक रणनीति के नजरिए से देखा जा रहा है।
ब्राह्मण वोट बैंक को लेकर सतर्क है भाजपा
उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समुदाय की आबादी लगभग 10 से 13 प्रतिशत के बीच मानी जाती है। पूर्वांचल, अवध और बुंदेलखंड क्षेत्रों में इस वर्ग का प्रभाव कई सीटों पर चुनावी नतीजों को प्रभावित करता है। राजनीतिक दल लंबे समय से इस समुदाय को साधने के लिए अलग-अलग रणनीतियां अपनाते रहे हैं। भाजपा भी पिछले कुछ चुनावों से क्षेत्रीय प्रभाव वाले नेताओं को अपने साथ जोड़कर सामाजिक समीकरण मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
आने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर तैयारी
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा की यह रणनीति केवल वर्तमान सत्ता संतुलन तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है। पार्टी ऐसे चेहरों को आगे बढ़ा रही है जिनकी अपने क्षेत्रों और समुदायों में मजबूत पकड़ मानी जाती है। इसी वजह से दूसरे दलों से आए नेताओं को भी सरकार और संगठन में अहम जिम्मेदारियां दी जा रही हैं।