MARDStrike – महाराष्ट्र में शुरू हुई रेजिडेंट डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल
MARDStrike– महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (MARD) ने राज्य सरकार की एक नई नीति के विरोध में बुधवार से राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। यह विरोध उस अधिसूचना को लेकर है, जिसके तहत निर्धारित प्रशिक्षण पूरा करने वाले होम्योपैथिक चिकित्सकों को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) में पंजीकरण और आधुनिक चिकित्सा की कुछ दवाएं लिखने की अनुमति दी गई है। संगठन का कहना है कि इस नीति को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट होने तक इसके क्रियान्वयन पर रोक लगाई जानी चाहिए।

अधिसूचना के बाद बढ़ा विवाद
30 जून को जारी अधिसूचना के अनुसार, बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी (BHMS) की डिग्री रखने वाले चिकित्सक यदि आधुनिक फार्माकोलॉजी का छह महीने का सर्टिफिकेट कोर्स (CCMP) पूरा कर लेते हैं, तो उन्हें निर्धारित प्रावधानों के तहत आधुनिक दवाएं लिखने की अनुमति दी जा सकती है। इसी निर्णय के विरोध में MARD ने राज्य सरकार से BHMS-CCMP पंजीकरण प्रक्रिया को अदालत के अंतिम निर्णय तक स्थगित रखने की मांग की है।
सरकार से बातचीत के बावजूद नहीं बनी सहमति
MARD के केंद्रीय अध्यक्ष अथर्व शिंदे ने बताया कि संगठन की सरकार और संबंधित अधिकारियों के साथ कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन कोई ऐसा आश्वासन नहीं मिला जिससे डॉक्टर संतुष्ट हो सकें। उन्होंने कहा कि हड़ताल आधी रात से प्रभावी हो गई है। यदि सरकार जल्द बातचीत शुरू नहीं करती, तो अगले 24 घंटे के बाद आपातकालीन सेवाओं को भी प्रभावित करने पर विचार किया जा सकता है।
शुरुआती चरण में आपात सेवाएं जारी
संगठन ने स्पष्ट किया है कि मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए हड़ताल के पहले 24 घंटे तक आपातकालीन और दुर्घटना संबंधी सेवाएं जारी रहेंगी। हालांकि, राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में नियमित ओपीडी सेवाएं, गैर-आपात चिकित्सा कार्य और शैक्षणिक गतिविधियां फिलहाल स्थगित रहेंगी।
कई चिकित्सा संगठनों ने दिया समर्थन
इस आंदोलन को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA), BMC MARD, महाराष्ट्र स्टेट रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन, एसोसिएशन ऑफ स्टेट मेडिकल इंटर्न्स, महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ गजेटेड मेडिकल ऑफिसर्स ग्रुप-ए और महाराष्ट्र स्टेट मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन सहित कई चिकित्सा संगठनों का समर्थन मिला है। इन संगठनों का कहना है कि स्पष्ट कानूनी और नियामक व्यवस्था के बिना नई नीति लागू करना उचित नहीं होगा, विशेषकर जब मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
दोनों पक्षों ने रखे अपने तर्क
इस मुद्दे पर मुंबई प्रेस क्लब में एलोपैथी और होम्योपैथी से जुड़े विशेषज्ञों के बीच चर्चा भी आयोजित की गई। एलोपैथिक पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे चिकित्सक जयेश लेले ने मरीजों की सुरक्षा और उपचार से जुड़ी जिम्मेदारियों को लेकर सवाल उठाए। वहीं, होम्योपैथी पक्ष के प्रतिनिधि बाहुबली शाह ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों की कमी को देखते हुए इस व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की गई है। फिलहाल इस विषय पर अंतिम निर्णय और आगे की दिशा सरकार तथा न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।