TaxReforms – कर व्यवस्था सुधार पर मुख्यमंत्री ने दिए जवाबदेही बढ़ाने के निर्देश
TaxReforms – राज्य कर विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा को लेकर सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शासन, मुख्यालय और फील्ड स्तर के अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक की। इस दौरान उन्होंने कर प्रणाली को अधिक सरल, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि जीएसटी पंजीकरण, रिटर्न दाखिल करने, अपीलों के निस्तारण और रिफंड जैसी प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी समाप्त की जानी चाहिए ताकि व्यापारियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ईमानदारी से कारोबार करने वाले व्यापारियों को किसी प्रकार की प्रशासनिक परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि कर प्रशासन का उद्देश्य केवल राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि व्यापारिक वातावरण को भी सुगम बनाना होना चाहिए।
व्यापारियों से संवाद बढ़ाने पर जोर
बैठक में मुख्यमंत्री ने छोटे और मध्यम कारोबारियों तक विभाग की पहुंच मजबूत करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने जिला और खंड स्तर पर करदाता सहायता कार्यक्रम नियमित रूप से चलाने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि कई छोटे व्यापारी तकनीकी प्रक्रियाओं और नियमों की पूरी जानकारी नहीं रख पाते, ऐसे में जागरूकता अभियान जरूरी हैं।
मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों को फील्ड में जाकर व्यापारियों से सीधे संवाद करने को कहा। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि जिन क्षेत्रों में राजस्व वृद्धि अपेक्षाकृत कम है, वहां विशेष कार्ययोजना बनाकर सुधार किया जाए। अधिकारियों से कहा गया कि करदाताओं की समस्याओं को मौके पर समझकर उनका समाधान सुनिश्चित करें।
जीएसटी संग्रह में प्रदेश ने बनाए नए रिकॉर्ड
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश को जीएसटी और वैट से कुल 1,15,977 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। यह संशोधित अनुमान का करीब 98.8 प्रतिशत बताया गया। जीएसटी संग्रह के मामले में उत्तर प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर रहा, जबकि महाराष्ट्र पहले और कर्नाटक तीसरे स्थान पर दर्ज किए गए।
अधिकारियों ने जानकारी दी कि जीएसटी बकाया वसूली के रूप में 2658 करोड़ रुपये जमा हुए, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक हैं। वहीं वैट बकाया से 800 करोड़ रुपये की वसूली हुई। प्रवर्तन इकाइयों के माध्यम से भी राजस्व संग्रह में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विभाग को करीब 1.98 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य दिया गया है। इसमें जीएसटी और वैट दोनों मदों से बड़े स्तर पर राजस्व संग्रह का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अप्रैल 2026 में ही राज्य ने 10,896 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से अधिक रहा।
फर्जी फर्मों और कर चोरी पर सख्ती जारी
बैठक में मुख्यमंत्री ने कर चोरी और बोगस फर्मों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि फर्जी कंपनियों से जुड़े मामलों में अब तक सैकड़ों एफआईआर दर्ज की गई हैं और कई गिरफ्तारियां भी हुई हैं। जांच प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए विशेष जांच दल का गठन भी किया गया है।
अधिकारियों के अनुसार इनपुट टैक्स क्रेडिट में गड़बड़ी से जुड़े मामलों में बड़ी राशि ब्लॉक की गई है। स्क्रूटनी और कानूनी कार्रवाई के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये की कर मांग भी तय की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक आधारित निगरानी और डेटा विश्लेषण से कर प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
लंबित अपीलों और रिफंड मामलों पर समीक्षा
अपीलों के निस्तारण की समीक्षा के दौरान बताया गया कि बड़ी संख्या में जीएसटी और वैट मामलों का समाधान किया जा चुका है, हालांकि अभी भी हजारों अपीलें लंबित हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इन मामलों का समयबद्ध तरीके से निपटारा किया जाए ताकि करदाताओं को लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े।
रिफंड प्रक्रिया को लेकर भी मुख्यमंत्री ने पारदर्शिता और गति बढ़ाने की बात कही। अधिकारियों ने जानकारी दी कि प्रदेश में जीएसटी रिफंड निस्तारण की औसत अवधि राष्ट्रीय औसत से कम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यापारियों की कार्यशील पूंजी प्रभावित न हो, इसके लिए रिफंड प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए।
तकनीक आधारित व्यवस्था को मिल रहा बढ़ावा
बैठक में यह भी बताया गया कि प्रदेश में कर प्रशासन को पूरी तरह डिजिटल और डेटा आधारित बनाने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। कई मामलों में वर्चुअल सुनवाई की सुविधा शुरू की गई है और डेटा मिसमैच की पहचान के लिए विशेष मॉड्यूल विकसित किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा एनालिटिक्स के उपयोग से भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और प्रशासनिक दक्षता दोनों बढ़ेंगी। उन्होंने अधिकारियों से पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम करने को कहा।