स्वास्थ्य

MobileRadiation – मोबाइल इस्तेमाल करने वालों के लिए आई बड़ी खबर, ब्रेन कैंसर पर हुआ नया वैज्ञानिक खुलासा

MobileRadiation– मोबाइल फोन आज लगभग हर व्यक्ति की दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। कामकाज से लेकर पढ़ाई, मनोरंजन और संवाद तक अधिकांश गतिविधियां अब स्मार्टफोन के जरिए ही पूरी होती हैं। इसी बढ़ते उपयोग के साथ लंबे समय से यह सवाल भी उठता रहा है कि क्या मोबाइल फोन से निकलने वाला रेडिएशन मस्तिष्क पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है या ब्रेन कैंसर जैसी बीमारी का कारण बन सकता है। अब इस विषय पर वैज्ञानिकों के नए विश्लेषण ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है।

वैज्ञानिकों ने कई पुराने अध्ययनों का किया विश्लेषण

मोबाइल फोन से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों को लेकर वर्षों से अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं। इन्हीं आशंकाओं को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने पहले प्रकाशित अनेक शोधों का विस्तृत विश्लेषण किया। यह समीक्षा उन वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित है जिन्हें विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की पहल के तहत स्वास्थ्य पर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों के प्रभाव को समझने के उद्देश्य से तैयार किया गया था। इन निष्कर्षों में मोबाइल फोन के उपयोग और मस्तिष्क, सिर या गर्दन के कैंसर के बीच कोई स्पष्ट संबंध नहीं पाया गया।

रेडिएशन शब्द से घबराने की जरूरत क्यों नहीं

विशेषज्ञों के अनुसार मोबाइल फोन रेडियो फ्रीक्वेंसी वाली कम ऊर्जा की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों का उपयोग करते हैं। यह ऊर्जा एक्स-रे जैसी उच्च ऊर्जा वाली किरणों से पूरी तरह अलग होती है। जहां हाई-एनर्जी रेडिएशन कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है, वहीं मोबाइल फोन से निकलने वाली तरंगों के बारे में उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण ऐसा जोखिम नहीं दर्शाते। इसी वजह से केवल “रेडिएशन” शब्द सुनकर हर प्रकार की तरंग को समान रूप से खतरनाक मानना सही नहीं माना जाता।

63 अध्ययनों के निष्कर्ष क्या बताते हैं

वैज्ञानिकों ने वर्ष 1994 से 2022 के बीच प्रकाशित 63 शोधों का विश्लेषण किया। इस व्यापक समीक्षा में यह देखा गया कि मोबाइल फोन का अधिक समय तक इस्तेमाल करने वाले लोगों और कम उपयोग करने वालों के बीच ब्रेन कैंसर, सिर के कैंसर या गर्दन के कैंसर के मामलों में कोई विश्वसनीय संबंध सामने नहीं आया। अध्ययन में यह भी पाया गया कि मोबाइल के वर्षों तक इस्तेमाल करने से भी कैंसर का जोखिम बढ़ने के प्रमाण नहीं मिले।

विशेषज्ञों ने बढ़ते मोबाइल उपयोग के बीच रखा तर्क

शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि मोबाइल फोन वास्तव में ब्रेन कैंसर का बड़ा कारण होते, तो दुनिया भर में मोबाइल उपयोग बढ़ने के साथ ब्रेन कैंसर के मामलों में भी स्पष्ट वृद्धि दिखाई देती। हालांकि उपलब्ध आंकड़ों में ऐसा रुझान नजर नहीं आता। उदाहरण के तौर पर ऑस्ट्रेलिया में पिछले कई दशकों के दौरान मोबाइल फोन का उपयोग तेजी से बढ़ा, लेकिन ब्रेन कैंसर की कुल दर लगभग स्थिर बनी रही।

फिर भी मोबाइल का संतुलित उपयोग जरूरी

वैज्ञानिकों ने यह भी स्पष्ट किया कि विज्ञान किसी भी विषय पर शून्य जोखिम की पूर्ण गारंटी नहीं देता। हालांकि मौजूदा वैज्ञानिक प्रमाण मोबाइल फोन के उपयोग और कैंसर के बीच किसी ठोस संबंध का समर्थन नहीं करते। इसके बावजूद लंबे समय तक लगातार स्क्रीन देखने, देर रात मोबाइल इस्तेमाल करने और अत्यधिक स्क्रीन टाइम से नींद, आंखों की सेहत, मानसिक एकाग्रता तथा बच्चों के विकास पर असर पड़ सकता है। इसलिए विशेषज्ञ संतुलित और जिम्मेदार मोबाइल उपयोग की सलाह देते हैं।

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