राष्ट्रीय

JagannathTemple – दीघा मंदिर विवाद पर फिर तेज हुई धार्मिक और राजनीतिक बहस

JagannathTemple – पश्चिम बंगाल के दीघा स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में है। रथ यात्रा के दौरान पुरी श्रीजगन्नाथ मंदिर से जुड़े वरिष्ठ दैतापति सेवक प्रमुख पाणिग्रही ने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा कि उन्होंने पहले ही दीघा मंदिर के संबंध में कुछ धार्मिक परंपराओं का पालन करने की सलाह दी थी, लेकिन उनकी बात स्वीकार नहीं की गई। उनका कहना था कि आपत्ति मंदिर निर्माण पर नहीं, बल्कि उसे “धाम” कहे जाने और पत्थर की प्रतिमा स्थापित किए जाने को लेकर थी।

धार्मिक परंपराओं का हवाला

प्रमुख पाणिग्रही ने कहा कि शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार देश में भगवान जगन्नाथ के अनेक मंदिर हो सकते हैं, लेकिन “जगन्नाथ धाम” की पहचान केवल पुरी से जुड़ी है। उनके अनुसार, धार्मिक परंपराओं का सम्मान करते हुए किसी नए मंदिर को धाम की संज्ञा नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्होंने यही सुझाव संबंधित पक्षों को दिया था, लेकिन उस पर अमल नहीं हुआ।

प्रतिमा को लेकर भी उठाए गए सवाल

उन्होंने यह भी कहा कि भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा पारंपरिक रूप से लकड़ी से बनाई जाती है और इसी परंपरा का पालन सदियों से किया जाता रहा है। उनके अनुसार, दीघा मंदिर में स्थापित पत्थर की प्रतिमा को लेकर भी कई धार्मिक विद्वानों ने पहले आपत्ति जताई थी। उनका मानना है कि मंदिर निर्माण स्वागत योग्य है, लेकिन धार्मिक विधि-विधान और स्थापित परंपराओं का पालन भी उतना ही आवश्यक है।

राजनीतिक टिप्पणी भी बनी चर्चा का विषय

बातचीत के दौरान प्रमुख पाणिग्रही ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के फैसलों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि उनकी ओर से दी गई सलाह पर ध्यान नहीं दिया गया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक विषयों को लेकर निर्णय लेते समय परंपराओं और आस्था से जुड़े नियमों का सम्मान किया जाना चाहिए। उनके इन बयानों को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है।

शुभेंदु अधिकारी का किया उल्लेख

प्रमुख पाणिग्रही ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि शुभेंदु अधिकारी उनके शिष्य रहे हैं और उनके अनुसार धार्मिक परंपराओं के अनुरूप ही कार्य किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कई संतों और धर्माचार्यों ने पहले भी दीघा मंदिर के नाम के साथ “धाम” शब्द के उपयोग पर आपत्ति दर्ज कराई थी।

पहले भी सामने आ चुकी हैं आपत्तियां

दीघा मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के समय भी पुरी मंदिर से जुड़े कई सेवायतों और पुजारियों ने सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखी थी। उनका कहना था कि किसी भी धार्मिक स्थल की स्थापना धर्मशास्त्रों में वर्णित परंपराओं के अनुरूप होनी चाहिए। कुछ धार्मिक विद्वानों ने यह भी कहा था कि दीघा एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और धार्मिक केंद्र बन सकता है, लेकिन उसे चार पारंपरिक धामों की श्रेणी में शामिल नहीं किया जा सकता।

स्थापना के बाद से जारी है विवाद

दीघा में भगवान जगन्नाथ का मंदिर मई 2025 में स्थापित किया गया था। यह मंदिर पुरी के प्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ मंदिर की स्थापत्य शैली से प्रेरित बताया जाता है। स्थापना के समय से ही इसके नाम, प्रतिमा की प्रकृति और धार्मिक मान्यताओं को लेकर अलग-अलग पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं। फिलहाल इस मुद्दे पर धार्मिक परंपराओं और राजनीतिक विमर्श, दोनों स्तरों पर चर्चा जारी है।

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