RamMandir – नवरात्रि के पहले दिन अयोध्या पहुंचीं राष्ट्रपति मुर्मू
RamMandir – नवरात्रि के शुभ अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अयोध्या स्थित राम मंदिर में पहुंचकर रामलला के दर्शन किए और पूजा-अर्चना में भाग लिया। यह उनका मंदिर में पहला औपचारिक दौरा था, जिसे धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूरे कार्यक्रम को विधि-विधान से सम्पन्न कराया गया, जिसमें देश की आस्था और परंपरा की झलक साफ दिखाई दी।

मंदिर पहुंचने पर हुआ औपचारिक स्वागत
राष्ट्रपति मुर्मू सुबह करीब साढ़े 10 बजे महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पहुंचीं, जहां उनका स्वागत राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री ने किया। इसके बाद वह सीधे अयोध्या के राम मंदिर परिसर के लिए रवाना हुईं। मंदिर पहुंचने पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ उनका अभिनंदन किया गया। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही, लेकिन पूरे कार्यक्रम को शांत और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न किया गया।
रामलला के दर्शन और विशेष पूजा
मंदिर में पहुंचकर राष्ट्रपति ने सबसे पहले रामलला के दर्शन किए। इसके बाद उन्होंने पूरे परिसर का अवलोकन किया और वहां चल रही व्यवस्थाओं की जानकारी ली। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान वैदिक आचार्यों ने मंत्रोच्चार के साथ विशेष पूजा संपन्न कराई। इस दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा और मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण बन गया।
द्वितीय तल पर श्रीराम यंत्र की स्थापना
इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रहा राम मंदिर के दूसरे तल पर श्रीराम यंत्र की स्थापना। वैदिक विधियों के अनुसार राष्ट्रपति मुर्मू ने स्वयं पूजा में भाग लिया और यंत्र की स्थापना की प्रक्रिया को पूरा किया। आचार्यों की देखरेख में यह अनुष्ठान संपन्न हुआ, जिसमें पारंपरिक नियमों का विशेष ध्यान रखा गया। इसे मंदिर के आध्यात्मिक स्वरूप को और सशक्त करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
श्रीराम यंत्र का धार्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार श्रीराम यंत्र केवल एक धातु संरचना नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। जिस प्रकार श्री यंत्र को देवी लक्ष्मी से जोड़ा जाता है, उसी तरह श्रीराम यंत्र को भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम की मर्यादा, धर्म और विजय का प्रतीक माना जाता है। यह यंत्र विशेष गणनाओं और वैदिक सिद्धांतों के आधार पर तैयार किया जाता है, जिससे इसमें एक विशिष्ट ऊर्जा का संचार माना जाता है।
कांचीपुरम से अयोध्या तक की यात्रा
श्रीराम यंत्र का निर्माण तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित एक प्रमुख मठ में किया गया। इसके बाद इसे आंध्र प्रदेश के तिरुपति लाया गया और वहां से विशेष रथयात्रा के माध्यम से अयोध्या पहुंचाया गया। यह यात्रा करीब दस दिन पहले पूरी हुई थी। इस पूरी प्रक्रिया को धार्मिक परंपराओं के अनुरूप आयोजित किया गया, जिससे इसकी पवित्रता और महत्व को बनाए रखा जा सके।
यंत्र की बनावट और विशेषताएं
इस यंत्र का वजन लगभग 150 किलोग्राम बताया जा रहा है और इसे विशेष धातुओं के मिश्रण से तैयार किया गया है। इसके ऊपर सोने की परत चढ़ाई गई है, जो इसे और अधिक दिव्य स्वरूप प्रदान करती है। निर्माण के दौरान शिल्प और आध्यात्मिक गणनाओं का संतुलन रखा गया है, जिससे यह केवल धार्मिक प्रतीक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर के रूप में भी स्थापित होता है।