LDA – आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक निर्माण की होगी व्यापक जांच
LDA – लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने अलीगंज अग्निकांड के बाद शहर की आवासीय संपत्तियों के उपयोग की व्यापक समीक्षा शुरू कर दी है। प्राधिकरण उन भवनों की पहचान कर रहा है जिनका नक्शा आवासीय श्रेणी में स्वीकृत हुआ, लेकिन उनका इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। इस उद्देश्य से विभिन्न योजनाओं में अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है और गोपनीय सर्वे कराया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद नियमों का उल्लंघन करने वाले भवनों पर कार्रवाई की जा सकती है।

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद शुरू हुई कार्रवाई
अलीगंज में आग की घटना के बाद मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया था कि जिस उद्देश्य के लिए किसी संपत्ति का पंजीकरण और स्वीकृति मिली है, उसका उपयोग उसी श्रेणी में होना चाहिए। इसी निर्देश के अनुरूप एलडीए ने शहर की विभिन्न कॉलोनियों में भवनों की स्थिति का आकलन शुरू किया है। सर्वे के दौरान भू-उपयोग, स्वीकृत मानचित्र और मौजूदा उपयोग का मिलान किया जा रहा है, ताकि नियमों के विपरीत संचालित इमारतों की पहचान की जा सके।
प्रमुख कॉलोनियों में कई भवन जांच के दायरे में
एलडीए की अलीगंज, गोमतीनगर, गोमतीनगर विस्तार, जानकीपुरम, जानकीपुरम विस्तार, शारदानगर और एलडीए कॉलोनी जैसी प्रमुख आवासीय योजनाएं इस अभियान के केंद्र में हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन क्षेत्रों की मुख्य सड़कों पर बड़ी संख्या में ऐसे भवन हैं, जहां आवासीय स्वीकृति के बावजूद होटल, अस्पताल, रेस्टोरेंट, कॉम्प्लेक्स और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। कई स्थानों पर पार्किंग व्यवस्था, निर्धारित सेटबैक और अन्य अनिवार्य मानकों का भी पालन नहीं किया गया है।
फायर सेफ्टी और अवैध निर्माण पर रहेगा विशेष ध्यान
सर्वे के दौरान उन भवनों को प्राथमिकता से चिह्नित किया जा रहा है जहां अग्नि सुरक्षा के आवश्यक इंतजाम नहीं हैं या बेसमेंट का उपयोग नियमों के विपरीत किया जा रहा है। एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के अनुसार, जिन भवन स्वामियों द्वारा फायर सेफ्टी मानकों का पालन कर लिया जाएगा और अवैध निर्माण हटाकर आवश्यक शमन मानचित्र स्वीकृत करा लिया जाएगा, उनके मामलों पर नियमानुसार विचार किया जाएगा। वहीं, नियमों का पालन नहीं करने वाले भवनों के खिलाफ सीलिंग और ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई भवन निर्माण उपविधियों के तहत की जाएगी।
अलीगंज अग्निकांड के बाद सामने आए थे कई तथ्य
22 जून को अलीगंज सेक्टर-डी स्थित एक एनीमेशन सेंटर की इमारत में लगी आग में 15 लोगों की मृत्यु हो गई थी। जांच में सामने आया कि भवन का मानचित्र आवासीय श्रेणी में स्वीकृत था, जबकि उसका उपयोग व्यावसायिक रूप से किया जा रहा था। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि वर्ष 2016 में अवैध निर्माण से संबंधित कार्रवाई शपथपत्र के आधार पर रोक दी गई थी। इसके बाद निर्माण की वास्तविक स्थिति का दोबारा सत्यापन नहीं किया गया।
पूरे शहर में नियमों के पालन की होगी समीक्षा
प्राधिकरण अब ऐसे सभी मामलों की समीक्षा कर रहा है, जहां पहले नोटिस या अन्य कार्रवाई की गई थी, लेकिन बाद में भवनों का उपयोग नियमों के अनुरूप है या नहीं, इसकी प्रभावी निगरानी नहीं हो सकी। अधिकारियों का मानना है कि यह अभियान भवन सुरक्षा, नियोजित शहरी विकास और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।