UTU – सम सेमेस्टर की अन्य परीक्षाओं में भी गड़बड़ी की आशंका, जांच तेज
UTU – उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (UTU) में प्रश्नपत्र लीक प्रकरण के बाद अब सम-सेमेस्टर की अन्य परीक्षाएं भी जांच के दायरे में आ गई हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन को आशंका है कि केवल एक विषय ही नहीं, बल्कि अन्य परीक्षा पत्रों में भी अनियमितता हो सकती है। इसी क्रम में परीक्षा नियंत्रक डॉ. वी.के. पटेल ने पुलिस को दी गई शिकायत में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड थ्योरी विषय के प्रश्नपत्र का भी उल्लेख किया है। शिकायत के अनुसार, यह प्रश्नपत्र भी उसी सहायक प्रोफेसर ने तैयार किया था, जिन पर पहले से जांच चल रही है। एहतियात के तौर पर विश्वविद्यालय ने इस विषय की परीक्षा रद्द कर दी है।

पुलिस शिकायत में अन्य लोगों की भूमिका की आशंका
विश्वविद्यालय की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत में यह भी कहा गया है कि पूरे मामले में केवल एक व्यक्ति ही नहीं, बल्कि अन्य लोगों की संभावित संलिप्तता की भी जांच आवश्यक है। इसी आधार पर पुलिस से मामले की विस्तृत जांच करने का अनुरोध किया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
भविष्य की परीक्षाओं के लिए जारी होंगे सख्त निर्देश
प्रश्नपत्र लीक की घटना के बाद विश्वविद्यालय ने परीक्षा व्यवस्था को और अधिक सुरक्षित बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रशासन ने कहा है कि यूटीयू से संबद्ध सभी कॉलेजों और संस्थानों को जल्द ही नए दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। इनका उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया की गोपनीयता बनाए रखना और भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना को न्यूनतम करना है। कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर ने कहा कि पात्र विद्यार्थियों के हितों की रक्षा विश्वविद्यालय की प्राथमिकता है और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए हर आवश्यक कदम उठाया जाएगा।
गोपनीय प्रक्रिया के बावजूद सामने आई गंभीर चूक
विश्वविद्यालय के अनुसार, प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया कई स्तरों पर गोपनीय तरीके से संचालित की जाती है। पहले समन्वयक और जिला समन्वयकों की नियुक्ति होती है, जिसके बाद संबद्ध संस्थानों के योग्य शिक्षकों की सूची तैयार की जाती है। इसी सूची से चयनित शिक्षक को प्रश्नपत्र तैयार करने की जिम्मेदारी दी जाती है। इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी सीमित अधिकारियों और संबंधित शिक्षक तक ही रहती है। इसके बावजूद प्रश्नपत्र लीक होने की घटना ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल गोपनीय चयन प्रक्रिया पर्याप्त नहीं है, बल्कि डिजिटल सुरक्षा और जवाबदेही को भी और मजबूत बनाने की आवश्यकता है। विश्वविद्यालय ने बताया कि प्रश्नपत्र तैयार करने वाले व्यक्ति को उपयोग की गई स्टेशनरी नष्ट करने, डिजिटल कॉपी भेजने के बाद ईमेल रिकॉर्ड हटाने और पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह गोपनीय रखने के स्पष्ट निर्देश दिए जाते हैं। अब इस घटना के बाद परीक्षा प्रणाली की समीक्षा कर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए जाने पर भी विचार किया जा रहा है।