Joshimath – शुरू हुआ भू-धंसाव प्रभावित पुश्तैनी मकानों के सर्वे का काम
Joshimath – उत्तराखंड के ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) नगर क्षेत्र में वर्ष 2023 के भू-धंसाव से प्रभावित परिवारों के लिए राहत प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने पुश्तैनी मकानों का सर्वे शुरू करा दिया है। इस अभियान के तहत पारंपरिक शैली में पत्थर और पठाल से बने पुराने आवासों का आकलन किया जा रहा है। सर्वे पूरा होने के बाद प्रत्येक प्रभावित भवन की स्थिति के आधार पर मुआवजा निर्धारित किया जाएगा और पात्र परिवारों को नियमानुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

लंबे समय से उठ रही थी मुआवजे की मांग
स्थानीय निवासी काफी समय से सरकार से मांग कर रहे थे कि केवल कंक्रीट के मकानों ही नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चले आ रहे पारंपरिक पुश्तैनी घरों को भी मुआवजा योजना में शामिल किया जाए। उनका कहना था कि इन मकानों का सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक महत्व भी उतना ही है जितना आधुनिक भवनों का। अब सरकार के इस निर्णय से उन परिवारों को भी राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके पारंपरिक घर भू-धंसाव की चपेट में आए थे।
पहले कंक्रीट भवनों को मिल चुका है मुआवजा
सरकार इससे पहले नगर क्षेत्र में क्षतिग्रस्त कंक्रीट के मकानों के लिए मुआवजा जारी कर चुकी है। अब पुनर्वास प्रक्रिया के अगले चरण में पुराने पत्थर और पठाल से निर्मित मकानों को भी शामिल किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, सर्वे के दौरान भवनों की वास्तविक स्थिति, क्षति के स्तर और पात्रता से जुड़े सभी पहलुओं का परीक्षण किया जा रहा है, ताकि मुआवजा वितरण में पारदर्शिता बनी रहे।
आवास योजनाओं के लाभार्थियों को भी मिलेगी राहत
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, राजीव आवास योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत निर्मित जिन मकानों को भू-धंसाव से नुकसान पहुंचा है, उन्हें भी मुआवजे के दायरे में शामिल किया जाएगा। इन मकानों का भी अलग से सर्वे किया जा रहा है। इसके आधार पर संबंधित लाभार्थियों को नियमानुसार सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
सर्वे रिपोर्ट के आधार पर होगा अंतिम निर्णय
प्रशासन का कहना है कि वर्तमान में प्रभावित भवनों का विस्तृत सर्वे जारी है। सर्वे रिपोर्ट तैयार होने के बाद प्रत्येक मामले की समीक्षा की जाएगी और उसी के अनुरूप मुआवजे की राशि तय होगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भू-धंसाव से प्रभावित सभी पात्र परिवारों को समान और न्यायसंगत राहत मिल सके तथा पुनर्वास की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जाए।