FestivalSafety – होली के दिन लखनऊ में हादसे और झगड़ों से सैकड़ों लोग घायल
FestivalSafety – राजधानी लखनऊ में होली का उत्साह कई जगहों पर लापरवाही और हुड़दंग की वजह से भारी पड़ गया। शहर के अलग-अलग इलाकों में नशे की हालत में वाहन चलाने, तेज रफ्तार और आपसी झगड़ों के कारण बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। हालात यह रहे कि दिनभर सरकारी और निजी अस्पतालों की इमरजेंसी में घायलों की भीड़ लगी रही। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, लगभग 400 लोग विभिन्न कारणों से अस्पताल पहुंचे, जिनमें से अधिकांश सड़क दुर्घटनाओं या झगड़ों में चोटिल हुए थे।

शराब के नशे में वाहन चलाना बना हादसों की बड़ी वजह
डॉक्टरों का कहना है कि त्योहार के दिन कई लोग शराब पीकर वाहन चला रहे थे, जिससे सड़क हादसों की संख्या बढ़ गई। तेज रफ्तार और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। कई मामलों में बाइक और कार की टक्कर के कारण लोग गंभीर रूप से घायल हुए, जबकि कुछ जगहों पर रंग खेलने के दौरान हुए विवाद भी झगड़ों में बदल गए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, त्योहारों के दौरान ऐसी घटनाएं अक्सर बढ़ जाती हैं, लेकिन इस बार मामलों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक रही। डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि उत्सव के समय भी यातायात नियमों का पालन करें और नशे की हालत में वाहन चलाने से बचें।
केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में इमरजेंसी पर बढ़ा दबाव
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के ट्रॉमा सेंटर में होली के दिन दोपहर तक इमरजेंसी वार्ड पूरी तरह व्यस्त हो गया था। ट्रॉमा सेंटर के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रेमराज सिंह ने बताया कि दोपहर तक कुल 248 मरीज इलाज के लिए पहुंचे। इनमें से 72 लोग सड़क दुर्घटनाओं में घायल हुए थे।
इन मरीजों में कई को सिर और हाथ-पैर में गंभीर चोटें आई थीं। 10 से अधिक लोगों में फ्रैक्चर पाया गया, जबकि सात मरीज ऐसे थे जिन्हें विषाक्तता से संबंधित समस्या के कारण लाया गया। डॉक्टरों की टीम ने लगातार काम करते हुए सभी मरीजों का उपचार किया और गंभीर घायलों को निगरानी में रखा गया।
बलरामपुर अस्पताल में भी बड़ी संख्या में मरीज
बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी में भी दिनभर मरीजों की संख्या काफी अधिक रही। अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी ने बताया कि कुल 365 लोग उपचार के लिए पहुंचे थे। इनमें से 51 मरीजों की स्थिति को देखते हुए उन्हें भर्ती करना पड़ा।
एक दिलचस्प और चिंताजनक पहलू यह भी सामने आया कि 73 लोग रैबीज का टीका लगवाने अस्पताल पहुंचे। डॉक्टरों का कहना है कि इनमें से कुछ मामलों में आवारा जानवरों के काटने की घटनाएं थीं, जबकि कुछ लोग एहतियात के तौर पर भी टीका लगवाने आए थे।
लोकबंधु अस्पताल और लोहिया संस्थान में भी उपचार
लोकबंधु अस्पताल में भी त्योहार के दौरान मरीजों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा रही। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय शंकर त्रिपाठी के अनुसार, पिछले 24 घंटे में 487 मरीज उपचार के लिए पहुंचे। इनमें से 60 लोग सड़क दुर्घटनाओं में घायल थे। हालत गंभीर होने पर 37 मरीजों को भर्ती कर उपचार शुरू किया गया।
डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में भी बड़ी संख्या में मरीज पहुंचे। यहां कुल 246 मरीजों का इलाज किया गया। हड्डी रोग विभाग में 27 मरीजों को भर्ती कर उपचार दिया गया, जबकि सर्जरी विभाग में 75 मरीजों का इलाज किया गया। इनमें से दो मरीजों की स्थिति गंभीर होने के कारण उन्हें आईसीयू में रखा गया है।
अन्य सरकारी अस्पतालों में भी उपचार जारी
शहर के अन्य सरकारी अस्पतालों में भी घायलों का इलाज किया गया। सिविल अस्पताल में कुल 70 लोग इलाज के लिए पहुंचे, जिनमें से 17 मरीजों को भर्ती करना पड़ा। वहीं, पीजीआई के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में 74 घायल पहुंचे थे। इनमें 20 से अधिक मरीजों की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कर उपचार दिया जा रहा है।
इसके अलावा रानी लक्ष्मीबाई संयुक्त चिकित्सालय, ठाकुरगंज संयुक्त चिकित्सालय, भाऊराव देवरस अस्पताल और राम सागर मिश्र अस्पताल में भी 75 से अधिक लोगों का इलाज किया गया। डॉक्टरों के अनुसार, अधिकांश मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया, जबकि गंभीर घायलों की निगरानी अस्पताल में जारी है।



