BuddhaPurnima – लखनऊ में अखिलेश यादव ने सामाजिक एकता पर दिया जोर
BuddhaPurnima – बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर समाजवादी पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने लोगों को शुभकामनाएं देते हुए सामाजिक एकजुटता और शांति का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय कई चुनौतियों से भरा हुआ है और ऐसे दौर में समाज को आपसी सहयोग और सद्भाव के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षु और पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे।

बुद्ध के विचारों को अपनाने की अपील
अपने संबोधन में अखिलेश यादव ने कहा कि भगवान बुद्ध के विचार आज भी समाज को दिशा देने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि करुणा, शांति और समानता का संदेश आज के समय में और अधिक प्रासंगिक हो गया है। अखिलेश ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश के बौद्ध धार्मिक स्थलों का ऐतिहासिक महत्व विश्व स्तर पर है और इनके विकास को लेकर निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए।
उन्होंने लुम्बिनी, सारनाथ और कुशीनगर जैसे बौद्ध स्थलों के संरक्षण और विकास की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों से उन्होंने सामाजिक सौहार्द बनाए रखने और संविधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहने की अपील भी की।
बौद्ध भिक्षुओं की मौजूदगी से खास बना आयोजन
समारोह में सैकड़ों बौद्ध भिक्षुओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान “बुद्धं शरणं गच्छामि” के उद्घोष से परिसर का वातावरण आध्यात्मिक रंग में दिखाई दिया। भिक्षुओं ने बुद्ध वंदना और धार्मिक उपदेशों का पाठ किया। आयोजन के दौरान शांति, अहिंसा और मानवता से जुड़े संदेशों पर भी चर्चा हुई।
कार्यक्रम में शामिल कुछ भिक्षुओं और वक्ताओं ने सामाजिक न्याय, शिक्षा और समान अवसरों से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने समाज में कमजोर वर्गों की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।
मुलायम सिंह यादव के कार्यों का हुआ उल्लेख
आयोजन में एक बौद्ध भिक्षु ने पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल का जिक्र करते हुए महिलाओं और पिछड़े वर्गों के लिए उनके प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय की दिशा में कई कदम उनके शासनकाल में उठाए गए थे। साथ ही संसद में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण की मांग भी कार्यक्रम में उठाई गई।
कुछ वक्ताओं ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लेकर भी अपनी राय व्यक्त की। हालांकि कार्यक्रम का मुख्य केंद्र बौद्ध दर्शन, सामाजिक समरसता और राजनीतिक-सामाजिक भागीदारी पर ही रहा। पार्टी नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी वर्गों को समान अवसर मिलना जरूरी है।
सामाजिक संवाद का मंच बना आयोजन
राजनीतिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण माना गया। इसमें सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समानता और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर चर्चा देखने को मिली। कार्यक्रम के अंत में लोगों ने बुद्ध पूर्णिमा के संदेश को समाज में फैलाने और शांति व भाईचारे की भावना मजबूत करने का संकल्प लिया।