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SanjuSamson – मोबाइल से दूरी, मैदान पर लौटी चमक

SanjuSamson – टी20 विश्व कप के अहम दौर में जब टीम इंडिया को ठोस शुरुआत की जरूरत थी, तब संजू सैमसन ने न सिर्फ बल्ले से जवाब दिया बल्कि अपने आत्मविश्वास की कहानी भी साझा की। खराब फॉर्म से जूझ रहे इस सलामी बल्लेबाज ने दबाव से निपटने के लिए एक असामान्य कदम उठाया—उन्होंने मोबाइल फोन बंद कर दिया और सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बना ली। उनका मानना था कि बाहरी शोर से दूर रहकर ही वह अपने खेल पर ध्यान केंद्रित कर पाएंगे।

सोशल मीडिया से बनाई दूरी

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हार के बाद टीम संयोजन में बदलाव हुआ और सैमसन को सलामी बल्लेबाज के रूप में मौका मिला। इससे पहले उनके प्रदर्शन पर सवाल उठ रहे थे। आलोचनाओं और अपेक्षाओं के बीच उन्होंने खुद को डिजिटल दुनिया से अलग कर लिया। उनका कहना है कि लगातार सुझाव और प्रतिक्रियाएं कभी-कभी खिलाड़ी के मन पर असर डालती हैं। ऐसे में उन्होंने अपने भीतर की आवाज सुनने का फैसला किया।

कोलकाता में वेस्टइंडीज के खिलाफ सुपर 8 मुकाबले में सैमसन ने 50 गेंदों पर 97 रन की नाबाद पारी खेली। इस दौरान उन्होंने 12 चौके और चार छक्के लगाए। उनकी यह पारी भारत को सेमीफाइनल तक पहुंचाने में निर्णायक साबित हुई।

चुनौतीपूर्ण लक्ष्य और संयम

वेस्टइंडीज ने मुकाबले में 196 रन का लक्ष्य रखा था। शुरुआत में ऐसा लगा कि ओस की वजह से रन चेज आसान हो सकता है, लेकिन नियमित अंतराल पर गिरते विकेटों ने मैच को रोमांचक बना दिया। कप्तान सूर्यकुमार यादव और तिलक वर्मा ने कुछ हद तक साथ दिया, लेकिन असली जिम्मेदारी सैमसन के कंधों पर आ गई।

उन्होंने स्वीकार किया कि अच्छी शुरुआत के बाद भी उन्हें संयम बनाए रखना पड़ा। जब टीम दबाव में थी, तब अनुभव ने काम किया। उन्होंने जोखिम भरे शॉट्स के बजाय परिस्थितियों के मुताबिक खेलना चुना और मौके मिलने पर बाउंड्री लगाई।

तकनीक और मानसिक तैयारी

न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू श्रृंखला में अपेक्षित प्रदर्शन न कर पाने के बाद सैमसन ने आत्ममंथन किया। उनका कहना है कि नकारात्मक विचार स्वाभाविक होते हैं, लेकिन उन्हें सकारात्मक सोच से बदलना जरूरी है। उन्होंने अपनी बुनियादी तकनीक पर फिर से काम किया और खुद को याद दिलाया कि इसी प्रारूप में वह पहले भी अंतरराष्ट्रीय शतक लगा चुके हैं।

करीब दस दिनों के ब्रेक ने उन्हें मानसिक रूप से संतुलित होने का अवसर दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि बाहरी सलाह बहुत मिलती है, लेकिन अंततः खिलाड़ी को अपने खेल पर भरोसा रखना पड़ता है।

सपने से हकीकत तक

कोलकाता की इस पारी को लेकर सैमसन भावुक भी दिखे। उन्होंने कहा कि देश के लिए खेलना हर युवा क्रिकेटर का सपना होता है। केरल के त्रिवेंद्रम से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर टीम के लिए निर्णायक भूमिका निभाना उनके लिए गर्व की बात है।

भारत अब सेमीफाइनल की तैयारी में है और सैमसन की यह पारी टीम के लिए आत्मविश्वास का स्रोत बनी है। दबाव के बीच खुद को संभालने और प्रदर्शन से जवाब देने की उनकी कहानी युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन सकती है।

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