ElectionTurnout – पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान शांतिपूर्ण, दर्ज हुई रिकॉर्ड वोटिंग
ElectionTurnout – पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान गुरुवार को शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। राज्य के 152 सीटों पर मतदाताओं ने बिना किसी डर या दबाव के अपने मताधिकार का प्रयोग किया। चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रखी गई थी, जिसका असर मतदान प्रक्रिया पर साफ दिखाई दिया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस चरण में करीब 92.88 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो कि पिछले चुनावों की तुलना में काफी अधिक माना जा रहा है। चुनाव आयोग और सुरक्षा एजेंसियों की तैयारियों को इस उच्च मतदान प्रतिशत का एक अहम कारण माना जा रहा है।

सुरक्षा व्यवस्था ने बढ़ाया मतदाताओं का भरोसा
इस बार चुनाव में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की व्यापक तैनाती ने मतदाताओं के बीच विश्वास का माहौल तैयार किया। लगभग 2.4 लाख जवानों की मौजूदगी ने यह सुनिश्चित किया कि मतदान पूरी तरह निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से हो। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी पहले चरण की मतदान प्रक्रिया पर संतोष व्यक्त करते हुए सुरक्षा बलों और चुनाव आयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की बुनियाद है और इसे बनाए रखने में सुरक्षा बलों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
चरणबद्ध तरीके से हुई बलों की तैनाती
पश्चिम बंगाल में चुनावी सुरक्षा की तैयारियां काफी पहले शुरू कर दी गई थीं। फरवरी से ही केंद्रीय बलों की तैनाती की योजना बनाई गई थी। कुल 2400 कंपनियों को सात चरणों में राज्य में भेजा गया। पहले चरण में 1 मार्च को 240 कंपनियां रवाना की गईं, जिनमें बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, एसएसबी और सीआईएसएफ के जवान शामिल थे। इसके बाद 10 मार्च को दूसरे चरण में अतिरिक्त कंपनियां भेजी गईं। तीसरे चरण में भी बड़ी संख्या में बलों को राज्य में तैनात किया गया, जिससे चुनावी क्षेत्रों में सुरक्षा का दायरा और मजबूत हुआ।
अंतिम चरण में बढ़ाई गई सुरक्षा तैनाती
जैसे-जैसे चुनाव आगे बढ़ा, सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त किया गया। चौथे और पांचवें चरण में 300-300 कंपनियों को तैनात किया गया। छठे चरण में 277 कंपनियां भेजी गईं, जिनके साथ आरपीएफ और एसएपी के जवानों को भी जोड़ा गया। सातवें और अंतिम चरण में सबसे ज्यादा 743 कंपनियों की तैनाती की गई। इसके अलावा राज्य सशस्त्र पुलिस की 300 कंपनियों को भी चुनावी ड्यूटी पर लगाया गया। इन सभी तैनातियों का उद्देश्य था कि किसी भी तरह की गड़बड़ी या हिंसा की संभावना को पूरी तरह खत्म किया जा सके।
संवेदनशील बूथों पर विशेष निगरानी
राज्य के अति संवेदनशील मतदान केंद्रों की पहचान कर वहां विशेष रूप से केंद्रीय बलों को तैनात किया गया। सीआरपीएफ को इन बूथों की जिम्मेदारी दी गई, जहां पहले स्थानीय पुलिस मौजूद थी, वहां बदलाव किया गया। मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की पहचान जांचने का काम भी केंद्रीय बलों को सौंपा गया, जिससे किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना कम हो सके। कई जगहों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी भी बीएसएफ के हवाले की गई थी, जिससे हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके।
प्रशासनिक सख्ती भी दिखी असरदार
चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए प्रशासन ने भी कई सख्त कदम उठाए। जिन अधिकारियों ने पिछले आम चुनावों में इसी क्षेत्र में ड्यूटी की थी, उन्हें बदल दिया गया। इसके अलावा कंपनी कमांडरों को निर्देश दिया गया कि वे होटल में ठहरने के बजाय अपने जवानों के साथ ही रहें, ताकि जमीनी स्तर पर निगरानी बेहतर बनी रहे। इन उपायों का असर चुनावी माहौल पर साफ नजर आया और मतदान प्रक्रिया बिना किसी बड़ी बाधा के संपन्न हुई।
आगे की चुनावी प्रक्रिया पर नजर
पश्चिम बंगाल विधानसभा की कुल 294 सीटों के लिए चुनाव दो चरणों में कराए जा रहे हैं। पहले चरण के बाद अब दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा। वहीं, मतगणना 4 मई को की जाएगी, जिसके बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि राज्य की सत्ता किसके हाथ में जाएगी। फिलहाल पहले चरण की शांतिपूर्ण और उच्च मतदान वाली प्रक्रिया को लोकतांत्रिक दृष्टि से सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।