राष्ट्रीय

WomenReservation – महिला आरक्षण में देरी को लेकर कांग्रेस का केंद्र पर आरोप

WomenReservation – कांग्रेस ने एक बार फिर महिला आरक्षण के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि महिलाओं को स और विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व देने के लिए लंबे समय से लंबित इस मुद्दे पर सरकार ने गंभीरता नहीं दिखाई। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पहले इस विषय को आगे बढ़ाने में देरी की गई और बाद में इसे परिसीमन प्रक्रिया से जोड़कर और टाल दिया गया।

सोनिया गांधी के पुराने पत्र का हवाला

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस मुद्दे पर पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के एक पुराने पत्र का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में महिला आरक्षण विधेयक को जल्द पारित कराने की मांग की थी। उस पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया था कि लोकसभा में सरकार के पास बहुमत है, इसलिए वह इस महत्वपूर्ण विधेयक को पारित करवा सकती है। कांग्रेस ने तब भी इस पहल का समर्थन करने की बात कही थी।

महिला सशक्तिकरण पर कांग्रेस का रुख

सोनिया गांधी ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया था कि महिलाओं के लिए आरक्षण का मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव से जुड़ा है। उन्होंने याद दिलाया था कि पंचायत और नगर निकाय स्तर पर महिलाओं को आरक्षण देने की पहल कांग्रेस सरकार के दौरान शुरू हुई थी, जिसे बाद में संवैधानिक रूप मिला। पार्टी का मानना है कि यही मॉडल बड़े स्तर पर भी लागू किया जा सकता है।

राहुल गांधी की मांग और चेतावनी

जयराम रमेश ने राहुल गांधी के एक पत्र का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक को संसद में पारित कराने के लिए सरकार से सहयोग मांगा था। राहुल गांधी ने कहा था कि यह विधेयक पहले ही राज्यसभा से पारित हो चुका है और इसे लोकसभा में लंबित रखना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि यदि इसमें और देरी हुई, तो इसे लागू करना और कठिन हो सकता है।

विपक्ष की मौजूदा मांग क्या है

विपक्षी दलों ने मांग की है कि मौजूदा लोकसभा सीटों के आधार पर ही महिला आरक्षण को लागू किया जाए। उनका कहना है कि इसके लिए सरकार को जल्द से जल्द नया विधेयक लाना चाहिए, ताकि इसे आगामी सत्र में पारित किया जा सके। इस मुद्दे पर विभिन्न दलों के बीच सहमति बनाने की कोशिश भी जारी है।

हालिया विधेयक पर नहीं मिल पाया समर्थन

हाल ही में इस विषय से जुड़ा एक प्रस्ताव लोकसभा में पारित नहीं हो सका। मतदान के दौरान विधेयक को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाया, जिसके चलते यह आगे नहीं बढ़ सका। प्रस्ताव में सीटों की संख्या बढ़ाने और महिला आरक्षण लागू करने की योजना शामिल थी, लेकिन पर्याप्त समर्थन के अभाव में इसे मंजूरी नहीं मिल सकी।

परिसीमन से जुड़ा है प्रस्ताव

प्रस्तावित योजना के तहत भविष्य में जनगणना के आधार पर परिसीमन करने के बाद महिला आरक्षण लागू करने की बात कही गई थी। इसके साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए एक तय प्रतिशत सीटें सुनिश्चित करने का प्रावधान था। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर भी राजनीतिक सहमति बनना अभी बाकी है।

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