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SupremeCourt – सीजेआई सूर्यकांत ने न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने पर दिया जोर

SupremeCourt – भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की एक सुनवाई के दौरान हुई विवादित घटना पर पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि संविधान से जुड़ी संस्थाओं की प्रतिष्ठा और मर्यादा बनाए रखना केवल न्यायपालिका की नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब एक सुनवाई के दौरान एक युवा अधिवक्ता पर अदालत में अनुचित व्यवहार और दस्तावेज फेंकने के आरोप चर्चा का विषय बने थे।

संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान का दिया संदेश

ऑल इंडिया सीनियर एडवोकेट्स एसोसिएशन (AISAA) द्वारा आयोजित एक सम्मान समारोह में मुख्य न्यायाधीश ने इस मुद्दे पर संयमित ढंग से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि युवा कभी-कभी भावनाओं में आकर गलतियां कर बैठते हैं, लेकिन इससे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि सभी नागरिक और कानूनी पेशे से जुड़े लोग संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान बनाए रखें। उनके अनुसार, लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है जब न्यायपालिका जैसी संस्थाओं की गरिमा का हर स्तर पर संरक्षण किया जाए।

पुराने मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए नई रोस्टर व्यवस्था

अपने संबोधन में न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के तेजी से निपटारे के लिए लागू की गई नई रोस्टर व्यवस्था की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब विशेष रूप से चार अलग-अलग पीठों का गठन किया गया है। इनमें दो पीठें दीवानी मामलों और दो पीठें आपराधिक मामलों की सुनवाई करेंगी। उनका कहना था कि इस व्यवस्था का उद्देश्य वर्षों से लंबित मामलों की सुनवाई में तेजी लाना और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है।

नियुक्ति प्रक्रिया में कई पहलुओं का होता है मूल्यांकन

मुख्य न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कॉलेजियम किसी भी नाम पर निर्णय लेने से पहले संबंधित न्यायाधीश की न्यायिक क्षमता, निष्पक्षता, अनुभव, ईमानदारी और कार्यशैली का व्यापक मूल्यांकन करता है। इसके साथ ही विभिन्न राज्यों और उच्च न्यायालयों का संतुलित प्रतिनिधित्व भी ध्यान में रखा जाता है, ताकि सर्वोच्च न्यायालय देश की विविधता और संवैधानिक मूल्यों का समुचित प्रतिनिधित्व कर सके।

सम्मान समारोह में नए और सेवानिवृत्त न्यायाधीश हुए सम्मानित

यह संबोधन उस समारोह के दौरान दिया गया, जिसमें हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त न्यायमूर्ति शील नागू, न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर, न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा, न्यायमूर्ति अरुण पल्ली और न्यायमूर्ति वी. मोहना का सम्मान किया गया। इसके अलावा हाल में सेवानिवृत्त हुए न्यायमूर्ति जे.के. महेश्वरी और न्यायमूर्ति पंकज मित्तल को भी उनके न्यायिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

वरिष्ठ अधिवक्ता ने मुख्य न्यायाधीश के सफर को बताया प्रेरणादायक

कार्यक्रम की शुरुआत ऑल इंडिया सीनियर एडवोकेट्स एसोसिएशन के महासचिव और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता आदिश सी. अग्रवाला के संबोधन से हुई। उन्होंने कहा कि हिसार की जिला अदालतों से लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश बनने तक न्यायमूर्ति सूर्यकांत की यात्रा समर्पण, अनुशासन और निरंतर मेहनत का उदाहरण है। उन्होंने यह भी कहा कि युवा अधिवक्ताओं को प्रोत्साहित करने की उनकी सोच ने बार और बेंच के बीच बेहतर संवाद और विश्वास को मजबूत करने में सकारात्मक भूमिका निभाई है।

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