SupremeCourt – जगन्नाथ फिल्म विवाद और दलबदल कानून पर सुनवाई को तैयार है शीर्ष अदालत
SupremeCourt- सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दो महत्वपूर्ण मामलों पर सुनवाई के लिए सहमति जताई। पहला मामला भगवान जगन्नाथ पर आधारित एनिमेटेड फिल्म की रिलीज से जुड़ा है, जबकि दूसरा संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दलबदल विरोधी कानून की व्याख्या से संबंधित जनहित याचिका का है। दोनों मामलों में अदालत के रुख पर कानूनी और राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।

जगन्नाथ फिल्म की रिलीज पर ओडिशा सरकार की आपत्ति
ओडिशा सरकार ने शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल कर भगवान जगन्नाथ पर आधारित एनिमेटेड फिल्म की रिलीज पर आपत्ति जताई है। राज्य सरकार का कहना है कि फिल्म के प्रदर्शन से कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित होने की आशंका है। सरकार ने अदालत से इस पहलू पर विचार करने का अनुरोध किया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के इस तर्क को ध्यान में रखते हुए मामले की सुनवाई के लिए सहमति दी है।
पहले भी अदालत दे चुकी है रिलीज की अनुमति
इससे पहले न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने रथ यात्रा से जुड़े धार्मिक कार्यक्रमों के पूरा होने के बाद, 28 जुलाई या उसके बाद फिल्म को देशभर में प्रदर्शित करने की अनुमति दी थी। फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से प्रदर्शन की मंजूरी भी मिल चुकी है। इसके बावजूद ओडिशा सरकार ने संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला देते हुए दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
मुख्य न्यायाधीश की पीठ करेगी सुनवाई
सोमवार को यह मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष उल्लेखित किया गया। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं। अदालत ने याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करने पर सहमति जताई, जिसके बाद अब दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
दलबदल विरोधी कानून से जुड़ी याचिका पर केंद्र को नोटिस
इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संविधान की दसवीं अनुसूची से जुड़े एक अन्य महत्वपूर्ण मामले में भी कार्रवाई की। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की ओर से दायर जनहित याचिका पर अदालत ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में उस कानूनी व्याख्या को चुनौती दी गई है, जिसके तहत विधायकों को राजनीतिक दल के विलय के आधार पर दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से राहत मिलने की व्यवस्था है। अदालत ने केंद्र से इस मामले में जवाब मांगा है। अब इस संवैधानिक प्रश्न पर भी आगामी सुनवाई में विस्तृत विचार किया जाएगा।