राष्ट्रीय

SupremeCourt – गाजियाबाद केस में एसआईटी जांच के आदेश, पुलिस पर उठे सवाल

SupremeCourt – गाजियाबाद में चार साल की बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए जांच को नई दिशा देने का फैसला किया है। अदालत ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया है कि मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल गठित किया जाए। यह कदम उस समय उठाया गया जब पीड़ित परिवार ने पुलिस की अब तक की कार्रवाई पर असंतोष जताया। अदालत ने साफ कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष और गहन जांच बेहद जरूरी है।

जांच के लिए विशेष टीम गठित करने का आदेश

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्देश दिया कि विशेष जांच दल का गठन तत्काल किया जाए। अदालत ने समयसीमा तय करते हुए कहा कि यह टीम शुक्रवार या अधिकतम शनिवार सुबह तक अधिसूचित हो जानी चाहिए। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि जांच की प्रक्रिया में किसी भी तरह की देरी न्याय के हित में नहीं होगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि टीम में अनुभवी अधिकारियों को शामिल किया जाए ताकि जांच प्रभावी ढंग से आगे बढ़ सके।

महिला अधिकारियों की भूमिका पर जोर

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि एसआईटी में महिला पुलिस अधिकारियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही टीम का नेतृत्व वरिष्ठ स्तर के अधिकारी, जैसे आयुक्त या आईजी रैंक के अधिकारी, को सौंपा जाए। कोर्ट का मानना है कि इस तरह की संवेदनशील घटनाओं में महिला अधिकारियों की मौजूदगी से जांच प्रक्रिया अधिक संतुलित और संवेदनशील बन सकती है। टीम को पीड़ित परिवार द्वारा उठाए गए सभी सवालों की गहराई से जांच करने को कहा गया है।

अस्पतालों की भूमिका भी जांच के दायरे में

सुप्रीम कोर्ट ने केवल अपराध की जांच तक सीमित न रहते हुए उन निजी अस्पतालों की भूमिका की भी जांच करने का निर्देश दिया है, जिन्होंने कथित रूप से बच्ची को इलाज देने से इनकार किया था। अदालत ने कहा कि यह पहलू भी उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि आपात स्थिति में इलाज से इनकार गंभीर लापरवाही की श्रेणी में आता है। इस बिंदु पर भी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है।

दो सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश

अदालत ने एसआईटी को दो सप्ताह के भीतर अपनी पूरक रिपोर्ट संबंधित निचली अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। साथ ही निचली अदालत को कहा गया है कि तब तक मामले में चल रही कार्यवाही को रोका जाए। यह निर्णय इसलिए लिया गया ताकि नई जांच रिपोर्ट आने तक किसी भी निष्कर्ष पर जल्दबाजी में न पहुंचा जाए। इससे पहले पीड़ित पक्ष ने अदालत में याचिका दाखिल कर निष्पक्ष जांच की मांग की थी।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने गाजियाबाद पुलिस के शुरुआती रवैये पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि प्राथमिकी दर्ज करने और जांच शुरू करने में जो देरी हुई, वह चिंताजनक है। इससे पहले भी अदालत इस मामले में पुलिस के व्यवहार को लेकर असंतोष जता चुकी है। घटना के दिन बच्ची को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन उसे समय पर इलाज नहीं मिल सका। बाद में सरकारी अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया।

घटना की पृष्ठभूमि

मामले के अनुसार, मार्च में एक पड़ोसी ने बच्ची को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था। जब बच्ची घर नहीं लौटी, तो परिवार ने उसकी तलाश शुरू की। बाद में वह गंभीर हालत में मिली, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया। इस घटना ने स्थानीय स्तर पर भी गहरी चिंता पैदा की और अब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद मामले की जांच पर सबकी नजरें टिकी हैं।

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