RajyaSabhaElection – ओडिशा में चार सीटों के लिए मतदान, आरोपों से गर्माई सियासत
RajyaSabhaElection – ओडिशा में सोमवार को राज्यसभा की चार सीटों के लिए मतदान होना है और इससे पहले ही राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। चुनाव को लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी बीजू जनता दल के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है। बीजद ने भाजपा पर विधायकों की खरीद-फरोख्त यानी कथित हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप लगाया है। यह चुनाव इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि राज्य में लगभग 12 वर्षों के बाद राज्यसभा के लिए मतदान की स्थिति बनी है। चार सीटों के लिए कुल पांच उम्मीदवार मैदान में हैं और जिन सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनकी अवधि दो अप्रैल तक है।

उम्मीदवारों के कारण दिलचस्प हुआ मुकाबला
इस बार के चुनाव में प्रमुख राजनीतिक दलों के कई प्रमुख चेहरे मैदान में हैं। भाजपा ने अपनी ओर से दो उम्मीदवार उतारे हैं, जिनमें राज्य इकाई के अध्यक्ष मनमोहन सामल और वर्तमान राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार शामिल हैं। इसके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं और उन्हें भाजपा का समर्थन प्राप्त है।
वहीं विपक्षी बीजू जनता दल ने संतृप्त मिश्रा और प्रख्यात यूरोलॉजिस्ट डॉ. दत्तेश्वर होटा को अपना उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने भी बीजद के उम्मीदवारों को समर्थन देने का फैसला किया है। इस वजह से चुनावी मुकाबला काफी रोचक हो गया है और सभी दल अपने-अपने पक्ष में समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।
संख्या बल ने बढ़ाई चुनाव की दिलचस्पी
ओडिशा विधानसभा में कुल 147 सदस्य हैं और यही संख्या राज्यसभा चुनाव के गणित को भी तय करती है। मौजूदा स्थिति में भाजपा के पास 79 विधायक हैं और इसके साथ तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी उसे प्राप्त है। दूसरी ओर बीजद के पास 48 विधायक हैं। जनवरी में दो विधायकों के निलंबन के बाद उसकी संख्या कम हुई थी। कांग्रेस के पास 14 विधायक हैं, जबकि एक सदस्य भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का है।
राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया के अनुसार किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिए कम से कम 30 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता होती है। भाजपा के पास उपलब्ध समर्थन के आधार पर वह अपने दो उम्मीदवारों को जिताने की स्थिति में दिख रही है। इसके बाद उसके पास कुछ अतिरिक्त वोट बच सकते हैं। वहीं बीजद के पास भी अपने एक उम्मीदवार को जीत दिलाने के बाद अतिरिक्त वोट रहेंगे, जिससे चौथी सीट को लेकर समीकरण जटिल हो गए हैं।
क्रॉस वोटिंग की संभावना पर चर्चा
विधानसभा में मौजूदा संख्या संतुलन को देखते हुए चौथी सीट को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों के बीच कई तरह की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है। किसी भी प्रमुख दल के पास अपने दम पर चौथी सीट सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं है। यही कारण है कि क्रॉस वोटिंग की संभावना को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
इसी पृष्ठभूमि में बीजद ने भाजपा पर विधायकों को प्रभावित करने के प्रयास का आरोप लगाया है। हालांकि भाजपा की ओर से इन आरोपों को खारिज किया गया है। राजनीतिक दलों के बीच जारी बयानबाजी ने चुनाव को और अधिक चर्चा में ला दिया है।
मतदान का समय और प्रक्रिया
राज्यसभा की इन सीटों के लिए मतदान सुबह नौ बजे से शुरू होने की उम्मीद है। मतदान प्रक्रिया विधानसभा परिसर में निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी कराई जाएगी। निर्वाचन प्रक्रिया में विधायकों द्वारा प्राथमिकता के आधार पर मतदान किया जाता है और उसके बाद मतों की गणना के जरिए परिणाम तय होते हैं।
इन चुनावों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि जिन चार सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें बीजद के निरंजन विश्सी और मुन्ना खान तथा भाजपा के सुजीत कुमार और ममता मोहंता शामिल हैं। इनके कार्यकाल की समाप्ति के बाद नई सदस्यता के लिए यह चुनाव कराया जा रहा है।
राज्य की राजनीति पर नजर
राज्यसभा चुनाव भले ही प्रत्यक्ष रूप से जनता के मतदान से नहीं होते, लेकिन इनका राजनीतिक महत्व काफी बड़ा माना जाता है। विधानसभा में दलों की ताकत और उनके बीच सहयोग या विरोध की स्थिति इन चुनावों में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
इसी कारण ओडिशा में होने वाला यह चुनाव राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और दलों के आपसी समीकरण को समझने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



