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NEETUG – दोबारा परीक्षा को चुनौती देने वाली याचिका पर टली सुनवाई

NEETUG – सुप्रीम कोर्ट ने नीट-यूजी 2026 की प्रस्तावित दोबारा परीक्षा को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। यह याचिका राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) द्वारा परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजन का निर्णय लेने के खिलाफ दायर की गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले से जुड़ी याचिकाएं पहले से ही एक निर्धारित पीठ के समक्ष लंबित हैं और नई याचिका भी उसी प्रक्रिया के तहत सुनी जाएगी।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के समक्ष मामले की तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया गया था, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया। न्यायालय ने कहा कि नीट-यूजी 2026 से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई पहले से न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा की पीठ कर रही है और यह याचिका भी जुलाई में उसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध की जाएगी।

परीक्षा रद्द करने के निर्णय पर उठे सवाल

याचिका में 3 मई को आयोजित नीट-यूजी 2026 परीक्षा को रद्द करने के फैसले पर आपत्ति जताई गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों के आधार पर पूरे देश के लाखों अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा देने के लिए बाध्य करना उचित नहीं है।

याचिका में कहा गया है कि बड़ी संख्या में ऐसे छात्र हैं जिनका किसी भी कथित गड़बड़ी से कोई संबंध नहीं था। ऐसे में सभी उम्मीदवारों के लिए परीक्षा दोबारा आयोजित करने का निर्णय उनके हितों और अधिकारों को प्रभावित कर सकता है।

जनहित याचिका में क्या कहा गया

यह जनहित याचिका स्वास्थ्य सेवाओं की पूर्व सहायक महानिदेशक मंगला कोहली द्वारा दायर की गई है। याचिका में दावा किया गया है कि जांच एजेंसियों द्वारा सामने आई जानकारी से यह संकेत मिलता है कि कथित गड़बड़ियां सीमित क्षेत्रों तक ही केंद्रित थीं।

याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि अनियमितताएं कुछ स्थानों तक सीमित थीं, तो पूरे देश में परीक्षा रद्द करना एक व्यापक कदम माना जा सकता है। इसी आधार पर अदालत से दोबारा परीक्षा के निर्णय की समीक्षा करने की मांग की गई है।

जांच रिपोर्ट का भी किया गया उल्लेख

याचिका में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच का भी हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया है कि अब तक सामने आए तथ्यों के अनुसार कथित अनियमितताओं का दायरा स्थानीय स्तर तक सीमित दिखाई देता है। हालांकि, मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है।

इस बीच, परीक्षा से जुड़े विवादों और कानूनी चुनौतियों के कारण लाखों छात्र आगे की प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं। मेडिकल प्रवेश परीक्षा से जुड़े निर्णयों का सीधा प्रभाव देशभर के अभ्यर्थियों और उनके शैक्षणिक भविष्य पर पड़ता है।

एनटीए ने दोबारा परीक्षा को लेकर दिया भरोसा

राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी ने पुनर्परीक्षा को लेकर अपनी तैयारी पर भरोसा जताया है। एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने कहा है कि दोबारा परीक्षा के आयोजन में सुरक्षा और पारदर्शिता के सभी आवश्यक उपाय लागू किए जाएंगे।

उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि परीक्षा प्रक्रिया को निष्पक्ष और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए अतिरिक्त निगरानी तंत्र का उपयोग किया जाएगा। एजेंसी का कहना है कि अभ्यर्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

जुलाई में अगली सुनवाई पर नजर

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट द्वारा तत्काल सुनवाई से इनकार किए जाने के बाद अब इस मामले की अगली कानूनी सुनवाई जुलाई में होने की संभावना है। न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा की पीठ के समक्ष इस विषय पर पहले से लंबित याचिकाओं के साथ इस नए मामले पर भी विचार किया जाएगा।

ऐसे में परीक्षा, पुनर्परीक्षा और उससे जुड़े कानूनी पहलुओं पर अंतिम स्थिति अदालत की आगामी सुनवाई के बाद ही अधिक स्पष्ट हो सकेगी। देशभर के लाखों छात्र और उनके परिवार अब न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण का इंतजार कर रहे हैं।

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