MilitaryExercise – मेघालय में शुरू हुआ 13 देशों का संयुक्त सैन्य अभ्यास
MilitaryExercise – मेघालय के उमरोई सैन्य स्टेशन में बुधवार से बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास ‘प्रगति 2026’ की शुरुआत हो गई। दो सप्ताह तक चलने वाले इस संयुक्त अभ्यास में भारत समेत 13 देशों के सैन्य दल हिस्सा ले रहे हैं। अभ्यास का मुख्य फोकस आतंकवाद विरोधी अभियान, सामरिक समन्वय और साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की रणनीति पर रहेगा।

भारतीय सेना के अधिकारियों के मुताबिक यह अभ्यास मित्र देशों के बीच सैन्य सहयोग को और मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इसमें विभिन्न देशों के सैनिक संयुक्त प्रशिक्षण, रणनीतिक अभ्यास और अनुभव साझा करने जैसी गतिविधियों में शामिल होंगे।
कई मित्र देशों की सेनाएं ले रही हैं हिस्सा
रक्षा जनसंपर्क अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने जानकारी दी कि इस सैन्य अभ्यास में भारत के अलावा भूटान, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, फिलीपींस, सेशेल्स, श्रीलंका और वियतनाम के सैनिक भाग ले रहे हैं।
उन्होंने बताया कि अभ्यास का उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना और आतंकवाद जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए साझा रणनीति विकसित करना है। सभी देशों की टुकड़ियों का भारतीय सेना ने औपचारिक स्वागत किया।
जंगल और पहाड़ी इलाकों में होगा प्रशिक्षण
अभ्यास के दौरान सैनिकों को अर्ध-पहाड़ी और जंगल वाले क्षेत्रों में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें संयुक्त ऑपरेशन की योजना बनाना, सामरिक अभ्यास करना और समन्वित कार्रवाई जैसी गतिविधियां शामिल होंगी।
अधिकारियों का कहना है कि ऐसे अभ्यास सैनिकों की कार्यक्षमता, सहनशक्ति और बदलती परिस्थितियों में तेजी से निर्णय लेने की क्षमता को बेहतर बनाते हैं। साथ ही विभिन्न देशों की सेनाओं के बीच आपसी तालमेल भी मजबूत होता है।
स्वदेशी रक्षा तकनीक का भी होगा प्रदर्शन
‘प्रगति 2026’ के दौरान भारत अपनी स्वदेशी रक्षा तकनीकों और सैन्य नवाचारों का प्रदर्शन भी करेगा। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत विकसित उपकरणों और तकनीकी प्रणालियों को सहभागी देशों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह अभ्यास केवल सैन्य प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तकनीकी सहयोग और रक्षा क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने का भी मंच है। भारतीय रक्षा कंपनियां भी इसमें अपने उत्पादों और नई तकनीकों की जानकारी साझा करेंगी।
साझा सुरक्षा चुनौतियों पर रहेगा फोकस
भारतीय सेना के अधिकारियों ने कहा कि वर्तमान समय में क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियां लगातार बदल रही हैं। ऐसे में मित्र देशों के बीच सामरिक सहयोग और समन्वय पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।
लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने कहा कि ‘प्रगति’ नाम क्षेत्रीय सेनाओं के बीच विकास, सहयोग और परिवर्तन की भावना को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह अभ्यास समानता, मित्रता और आपसी सम्मान को मजबूत करने में मदद करेगा।
सैन्य सहयोग को मिलेगा नया आयाम
भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के संयुक्त अभ्यास से सैन्य-से-सैन्य संबंध मजबूत होते हैं और अलग-अलग देशों के सैनिकों को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली समझने का अवसर मिलता है।
अभ्यास के दौरान साझा अनुभवों और रणनीतियों के आदान-प्रदान से भविष्य में क्षेत्रीय सुरक्षा अभियानों में बेहतर समन्वय की संभावना बढ़ेगी। रक्षा विशेषज्ञ इसे हिंद महासागर क्षेत्र में सामरिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मान रहे हैं।