Investigation – मुंबई मुहर्रम जुलूस मामले में आरोपी के बयान से जांच को मिली नई दिशा
Investigation – मुंबई में मुहर्रम के जुलूस के दौरान कथित तौर पर जहरीले कैप्सूल बांटने की साजिश की जांच में पुलिस को आरोपी से पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां मिली हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी फैयाज निसार हुसैन प्रेमजी ने अपने बयान में दावा किया कि उसका उद्देश्य किसी की जान लेना नहीं था, बल्कि जुलूस के दौरान अव्यवस्था और लोगों में परेशानी पैदा करना था। हालांकि पुलिस पूरे मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है और आरोपी के दावों का स्वतंत्र सत्यापन किया जा रहा है।

पुलिस जांच में सामने आई तैयारी की जानकारी
जांच के अनुसार, आरोपी ने कथित तौर पर घटना से पहले इसकी विस्तृत तैयारी की थी। पुलिस का कहना है कि उसने ऑनलाइन माध्यम से खाली कैप्सूल और जिंक फास्फाइड मंगवाया, जिसका उपयोग सामान्यतः चूहों को मारने वाले रसायन के रूप में किया जाता है। पूछताछ में आरोपी ने यह भी बताया कि उसने पहले अलग-अलग स्तर पर इसकी जांच करने की कोशिश की थी ताकि कथित रूप से ऐसी मात्रा तय की जा सके, जिससे लोगों की तबीयत बिगड़े लेकिन जान का खतरा न हो। पुलिस इन दावों की वैज्ञानिक और फोरेंसिक जांच भी करा रही है।
समुदाय के प्रति नाराजगी का किया जिक्र
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपने ही शिया समुदाय के प्रति गहरी नाराजगी व्यक्त की। जांच में सामने आया कि वह अपने निजी और पारिवारिक विवादों के लिए समुदाय को जिम्मेदार मानता था। अधिकारियों का कहना है कि इसी कथित सोच के चलते उसने मुहर्रम के अवसर को निशाना बनाने की योजना बनाई। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस साजिश में कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं।
पारिवारिक और सामाजिक परिस्थितियां भी जांच के दायरे में
जांच में यह भी सामने आया है कि फैयाज प्रेमजी का वैवाहिक और पारिवारिक जीवन लंबे समय से तनावपूर्ण रहा था। पुलिस के अनुसार, कुछ वर्ष पहले उसकी पत्नी उससे अलग हो गई थी और परिवार के भीतर भी रिश्तों में खटास थी। अधिकारियों का कहना है कि वह कई प्रकार की दवाओं का सेवन भी कर रहा था। फिलहाल उसकी मानसिक स्थिति और चिकित्सा संबंधी पहलुओं की भी जांच की जा रही है, हालांकि इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष आना अभी बाकी है।
विदेश प्रवास और कथित योजना का क्रम
पुलिस के अनुसार, वर्ष 2019 में फैयाज अपनी मां, भाई और बहनों के साथ ईरान चला गया था, जहां उसने फास्ट फूड का कारोबार शुरू किया। बाद में वर्ष 2025 में वह पुणे लौट आया। जांच में आरोपी ने यह भी दावा किया कि उसके दादाजी शिया समुदाय की कुछ परंपराओं के विरोध में अभियान चलाते थे, जिसका असर उसके विचारों पर पड़ा। पुलिस का कहना है कि पुणे लौटने के बाद वह मुहर्रम का इंतजार कर रहा था और उसने कथित तौर पर काफी पहले से योजना बनानी शुरू कर दी थी। पूछताछ में उसने यह भी बताया कि ऑनलाइन स्रोतों और वीडियो की मदद से कैप्सूल तैयार करने की प्रक्रिया सीखी और बड़ी संख्या में कैप्सूल बनाए।
जांच अभी जारी, सभी दावों का हो रहा सत्यापन
मुंबई पुलिस का कहना है कि आरोपी के सभी बयानों का साक्ष्यों, फोरेंसिक रिपोर्ट और अन्य तकनीकी जांच के आधार पर सत्यापन किया जा रहा है। जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि घटना की योजना कितने समय से बनाई जा रही थी और इसके पीछे कोई अन्य उद्देश्य या सहयोगी तो नहीं थे। मामले की जांच पूरी होने के बाद ही सभी तथ्यों पर अंतिम तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।