Defence – एलएसी पर सतर्कता बरकरार, सेना प्रमुख ने साझा की भविष्य की रणनीति
Defence – पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच तनाव कम होने के बावजूद वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारतीय सेना पूरी तरह सतर्क बनी हुई है। निवर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि सीमा पर स्थिरता बनाए रखने के लिए दोनों देशों की सेनाओं के बीच नियमित संवाद जारी है। उनके अनुसार, स्थानीय स्तर पर हर वर्ष 1100 से अधिक बार बातचीत होती है, जिससे छोटे-छोटे विवादों और गलतफहमियों को समय रहते सुलझाने में मदद मिलती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा स्थिति पहले की तुलना में बेहतर है, लेकिन संवेदनशीलता अब भी बनी हुई है।

सीमा पर संवाद और समन्वय की प्रक्रिया जारी
जनरल द्विवेदी ने बताया कि भारत और चीन के बीच सैन्य तथा कूटनीतिक स्तर पर बातचीत का सिलसिला लगातार चल रहा है। उन्होंने कहा कि हॉटलाइन, फ्लैग मीटिंग और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की नियमित बैठकों के माध्यम से सीमा से जुड़े मुद्दों पर संवाद बनाए रखा जाता है। उनके मुताबिक, कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली और सीमा व्यापार को फिर से शुरू करने की दिशा में हुई सहमति जैसे कदम दोनों देशों के संबंधों में धीरे-धीरे सामान्य स्थिति लौटने के संकेत देते हैं। हालांकि उन्होंने दोहराया कि भारतीय सेना किसी भी संभावित चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
आधुनिक युद्ध की बदलती जरूरतों पर जोर
सेना प्रमुख ने कहा कि हाल के वर्षों में सैन्य रणनीति में तेजी से बदलाव आया है और भविष्य के युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रहेंगे। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अभियान ने संयुक्त सैन्य संचालन, तकनीक आधारित युद्ध क्षमता और विभिन्न सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय की प्रभावशीलता को प्रदर्शित किया। उनके अनुसार, ड्रोन, साइबर क्षमता, सुरक्षित संचार प्रणाली और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन भविष्य की सैन्य तैयारियों का अहम हिस्सा बन चुके हैं।
सेना के आधुनिकीकरण पर विशेष फोकस
जनरल द्विवेदी ने बताया कि भारतीय सेना नई परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी संरचना में बदलाव कर रही है। उन्होंने कहा कि रुद्र ब्रिगेड, भैरव बटालियन, अशनि ड्रोन प्लाटून, शक्तिबाण रेजिमेंट, दिव्यास्त्र बैटरी और बाज बटालियन जैसी नई इकाइयों का गठन किया जा रहा है। इनका उद्देश्य निगरानी क्षमता बढ़ाना, वास्तविक समय में खुफिया जानकारी जुटाना और ड्रोन आधारित अभियानों को अधिक प्रभावी बनाना है। उन्होंने कहा कि सेना का लक्ष्य तकनीक-संचालित और नेटवर्क आधारित युद्ध प्रणाली को मजबूत करना है।
अग्निपथ योजना पर सकारात्मक अनुभव
अग्निपथ योजना के बारे में जनरल द्विवेदी ने कहा कि शुरुआती अनुभव उत्साहजनक रहे हैं। उनके अनुसार, अग्निवीर सैन्य प्रशिक्षण, यूनिट जीवन और फील्ड की आवश्यकताओं के अनुरूप तेजी से खुद को ढाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के सैनिक आधुनिक तकनीकों को तेजी से अपनाने में सक्षम हैं, जिससे सेना की परिचालन क्षमता मजबूत हो रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि योजना का लगातार मूल्यांकन किया जा रहा है और भविष्य में किसी भी बदलाव का निर्णय सेना की जरूरतों तथा व्यावहारिक अनुभव के आधार पर लिया जाएगा।
आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को बताया रणनीतिक आवश्यकता
जनरल द्विवेदी ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता अब केवल विकास का लक्ष्य नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्य आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी संकट या संघर्ष की स्थिति में देश को हथियारों, गोला-बारूद और रक्षा तकनीक के लिए बाहरी स्रोतों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उनके अनुसार, भारतीय सेना स्वदेशी तकनीक, ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित समाधान और आधुनिक संचार नेटवर्क को तेजी से अपनाने पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि इस दिशा में डीआरडीओ, निजी उद्योग, स्टार्टअप और शैक्षणिक संस्थानों के साथ समन्वय बढ़ाया जा रहा है ताकि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।