राष्ट्रीय

GauhatiHighCourt – खारिज हुई पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका, जांच जारी…

GauhatiHighCourt – गौहाटी हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को राहत देने से इनकार करते हुए उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। यह याचिका उस प्राथमिकी से जुड़ी थी, जो असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा द्वारा दर्ज कराई गई थी। खेड़ा ने संभावित गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला नहीं दिया।

सुनवाई के बाद सुरक्षित रखा गया था फैसला

इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पार्थिवज्योति सैकिया की एकल पीठ ने की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने 21 अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सार्वजनिक किया गया है। फिलहाल विस्तृत आदेश का इंतजार किया जा रहा है, जिसमें अदालत अपने निर्णय के पीछे के कारणों को विस्तार से स्पष्ट करेगी।

बचाव पक्ष ने उठाए राजनीतिक मंशा के सवाल

खेड़ा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में दलील दी कि यह मामला राजनीतिक कारणों से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि पूरे विवाद का संबंध राजनीतिक बयानबाजी से जुड़ा है और ऐसे में निष्पक्ष जांच को लेकर आशंकाएं पैदा होती हैं, खासकर जब चुनावी माहौल सक्रिय हो। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि खेड़ा के फरार होने की कोई संभावना नहीं है और उनसे पूछताछ के लिए हिरासत जरूरी नहीं है।

आरोपों की प्रकृति पर भी उठी बहस

बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत के सामने यह तर्क रखा कि आरोपों की प्रकृति गंभीर आपराधिक अपराधों की श्रेणी में नहीं आती। उनका कहना था कि अधिकतम यह मामला आपराधिक मानहानि तक सीमित हो सकता है, जिसे अलग कानूनी प्रक्रिया के जरिए सुलझाया जा सकता है। उन्होंने आरोपों को निराधार और दुर्भावना से प्रेरित बताते हुए कहा कि इस तरह के मामलों में गिरफ्तारी उचित नहीं ठहराई जा सकती।

राज्य सरकार ने किया कड़ा विरोध

दूसरी ओर, असम सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल देवजीत लोन सैकिया ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि मामला केवल मानहानि तक सीमित नहीं है। उन्होंने अदालत को बताया कि इसमें धोखाधड़ी और जालसाजी जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं, जिनकी जांच के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी हो सकती है। राज्य पक्ष का कहना था कि दस्तावेजों में कथित हेरफेर जैसे पहलुओं की जांच बिना कस्टोडियल पूछताछ के संभव नहीं होगी।

आगे की प्रक्रिया पर नजर

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी। साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि बचाव पक्ष आगे किस तरह की कानूनी रणनीति अपनाता है। मामले का राजनीतिक संदर्भ भी इसे चर्चा में बनाए हुए है, लेकिन फिलहाल अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि अग्रिम जमानत के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाए गए।

Back to top button

Adblock Detected

Please disable your AdBlocker first, and then you can watch everything easily.