बिहार

MithilaArt – बिहार संग्रहालय में हुआ मिथिला पेंटिंग प्रदर्शनी का आयोजन

MithilaArt – अगर आप लोक कला और पारंपरिक भारतीय चित्रकला में रुचि रखते हैं, तो पटना स्थित बिहार संग्रहालय में आयोजित होने जा रही एक खास प्रदर्शनी आपके लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती है। यहां मिथिला पेंटिंग पर आधारित एक विशेष प्रदर्शनी आयोजित की जा रही है, जिसमें इस कला की ऐतिहासिक यात्रा से लेकर आधुनिक रूप तक को एक ही मंच पर देखने का अवसर मिलेगा। यह प्रदर्शनी 9 मई से शुरू होकर 8 जून तक चलेगी, जिसमें देश-विदेश के कला प्रेमियों के पहुंचने की उम्मीद है।

परंपरा और आधुनिकता का संगम

इस प्रदर्शनी की खासियत यह है कि इसमें मिथिला पेंटिंग के विकास के विभिन्न चरणों को दर्शाया जाएगा। पारंपरिक शैली से लेकर आधुनिक प्रयोगों तक, दर्शक एक ही स्थान पर इस कला के बदलते स्वरूप को समझ सकेंगे। आयोजकों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य न केवल कला को प्रदर्शित करना है, बल्कि नई पीढ़ी को इसकी जड़ों से जोड़ना भी है।

जगदंबा देवी की कृतियां होंगी आकर्षण का केंद्र

प्रदर्शनी में मिथिला कला की प्रतिष्ठित कलाकार और पद्मश्री सम्मान से सम्मानित जगदंबा देवी की दुर्लभ कृतियां भी प्रदर्शित की जाएंगी। उनके साथ ही करीब 50 से 60 अन्य प्रसिद्ध कलाकारों की पेंटिंग्स भी यहां देखने को मिलेंगी। इन कलाकारों ने देश और विदेश में मिथिला कला को पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में यह प्रदर्शनी कला प्रेमियों के लिए एक समृद्ध अनुभव साबित हो सकती है।

कला से जुड़े उत्पाद भी उपलब्ध

दर्शकों के लिए संग्रहालय में एक विशेष व्यवस्था भी की गई है। यहां मौजूद सोविनियर शॉप में मिथिला पेंटिंग से जुड़े विभिन्न उत्पाद उपलब्ध होंगे। इनमें सजावटी वस्तुएं और रोजमर्रा के उपयोग की चीजें शामिल हैं, जिन्हें लोग अपने साथ स्मृति के रूप में ले जा सकते हैं। इससे स्थानीय कलाकारों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

दीवारों से निकलकर जीवन का हिस्सा बनी कला

बिहार संग्रहालय के अपर निदेशक अशोक कुमार सिन्हा के अनुसार, मिथिला पेंटिंग अब केवल दीवारों तक सीमित नहीं रही है। यह धीरे-धीरे दैनिक जीवन का हिस्सा बनती जा रही है। आज यह कला बोतलों, डायरी, शॉल और अन्य उपयोगी वस्तुओं पर भी दिखाई देती है। इससे इसकी लोकप्रियता और पहुंच दोनों में वृद्धि हुई है।

वैश्विक स्तर पर बढ़ती पहचान

मिथिला पेंटिंग ने पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान मजबूत की है। विभिन्न देशों में आयोजित प्रदर्शनियों और कला आयोजनों में इसे सराहा गया है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से इस पारंपरिक कला को नई ऊर्जा मिलती है और कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिलता है।

कला प्रेमियों के लिए खास अवसर

यह प्रदर्शनी उन लोगों के लिए विशेष अवसर है, जो भारतीय लोक कला को करीब से समझना चाहते हैं। यहां एक ही स्थान पर विभिन्न कलाकारों की कृतियों को देखना और उनकी शैली को समझना संभव होगा। इससे न केवल कला के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि इसकी विरासत को आगे बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

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